बादल और पतंग | Badal Aur Patang

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Badal Aur Patang by राजेन्द्र उपाध्याय - Rajendra Upadhyay

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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धन किसका भोगीलाल पाटीदार चुण्डावाडा गॉव मे सभी जातियो के लोग रहते है | तीज त्यौहार सभी मिल-जुलकर मनाते हे ।कभी मन-मुटाव नही होता | कदाच विवाद हो भी जाए तो आपस मे मिलकर सुलझा लेते है | एक वार गाँव मे अकाल पडा | दूसरे वर्ष अतिवृष्टि से फलल चोपट हो गई। खेती करने वाले किसानो को भी अनाज खरीदकर खाने की नांवत आ गई | रामेश्वर और रामधन अच्छे मित्र थे । इस बात को पूरा गॉव जानता था । रामेश्वर खेती करता था । उसके पास जमीन अच्छी थी, इस कारण उपज बहुत होती थी । रामधन का धन्धा दुकानदारी का था | जमीन थी लेकिन अच्छी नही होने से कोड बटाई पर भी नही करता था। गाव मे अनाज की पाक कम होने से दुकान ठप्प हो गई | उसका एक रिश्तेदार खाडी देश मे रहता था | उसने सोचा- दुकान मे चला लूँगा ओर लडक॑ को विदेश भेज दूँगा, जिससे गृहस्थी की गाडी आराम से चलेगी | कुछ रुपए ता है ओर शेप खेत बेच कर पूरे कर लूगा ।' अपने मन की वात उसने अपने मित्र को बताई | रामेश्वर ने खंत न बेचने की सलाह दी ओर कहा-'जितने रुपयो की जरूरत हो मुझ से ले जाना ।' रामधन किसा का उपकार लेना नही चाहता था ओर फिर खेतो से कुछ मिलता भी तो नही था (आखिर थक कर रामेश्वर ने आम्वावाला खेत खरीद लिया ओर उसकी कीमत चुका दी । रामधन का लडका खाडी देश चला गया | वहाँ उसके रिस्तेदार ने उसकी नोकरी भी लगा दी । एक साल मे उसने अपने आने का खर्चा कमा लिया | तभी वहा दोनों देशा के वीच युद्ध छिड़ गया | सभी लोग अपने देश चले आए, उनके साथ रामधन का लडका भी चला आया। रामेश्वर ने जो खेत रामधन से लिया था, वह कई सालो से विना खेती किए पड़ा था। जमीन अच्छी नही होने से किसी न॑ वटाई पर खेती नही की थी | रामश्यर | की मड़ बनवाई, चारो ओर वाड़ लगवाई ओर बाहर से अच्छी मिट्टी ला+ डाली । आपाठ आने पर अच्छी वर्षा हुइ 1 रामेश्वर का लड़का हल लेकर डक फास्य




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