आग और आँसू | Aag Aur Aansoo

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutShakuntala Bhargav
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2 MB
कुल पष्ठ :
270
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about शकुन्तला भार्गव - Shakuntala Bhargav
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)सपीत्तरे २
दुभगी भाई दाश की
प्राह, पिता की क्या स्थिति थी !
रही विश्व में महा ग्रभागिन
भ्रपने में यद्यपि निश्पम,
राजकुमारी, जिसे पमिले श्रे
सोने के तन, श्रशन, वसन !
मिट्टी की तृध्णा से जिसका
जीवन जल-जल जीर्ण हुआ !
हरित दूर्वा का आाकप॑ण
जिसे खीचता नित्य रहा !
किन्तु न उस तक पहुंच सकी
ऊँचे महलों में पत्ती, बढ़ी !
जन-साधारण-जीवन--स्पर्दध
मृगजल-सी ही जान पड़ी !
जीवन-तृप्णा ने अन्तर को
जब-जब टेरा, करी पुकार !
विकल, छुटपंटाई बन्दी-सी
विकट जड़े थे सारे द्वार !
दीवारों-द्वारों से व्करा
घायल इच्छाएँ रोई ।
उस वेभव की चमक-दमक में
गरीड़ा की झाहें खोई
User Reviews
No Reviews | Add Yours...