विश्वास बढ़ता ही गया | Vishwas Badhata Hee Gaya

55/10 Ratings. 1 Review(s) अपना Review जोड़ें |
Book Image : विश्वास बढ़ता ही गया  - Vishwas Badhata Hee Gaya
[adinserter block="2"]

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about शिवमंगल सिंह - Shaivmangal Singh

Add Infomation AboutShaivmangal Singh

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
छोटे मोटे प्राधातों से हार नहीं सकता मेरा मनजग का कलरव अमर, झमर गति के शंकर का ताण्डव-नत्तेंन एक चरण को ठम्क, विदव के सामूहिक जन-मन का ऋदनजब तक विहग वालिकाए ऊपा से होली खेल रही हैं-नव घुग के स्वणिम विहान को रोक नहीं सकते उलृक-गन, छोटे मोठे श्रोघातों से हार नहीं सकता मेरा मन )




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now