ब्राह्मण सर्वस्व | Brahman Sarvasva

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
28 MB
कुल पष्ठ :
570
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)विषय-सूची ।->सछ॥ स्का
१-मंगलाचरण 9० न 1 न है ढंग *%.. ०४०. ४०60 «० ५३७ '
सूखरणणश्रमधर्म ०७ ही ह० कण 1 - -+- - + + ७८०
३-भहीर तथा गहरिया जाति किस वर्णमें है पक, - जे पड 3 प्
४-हिल्दी निरुक्त (नेघण्टुक काण्य) हा हा ह»+....««« दुष्ट
०-शोकाअलिः [ रुद्रदत्त मिश्र 1 7 है *« * .,. * , :प६६'
&-मूतिपूजा [ जय॑बन्तराम वी, ए, वी, टी, ] ५ ३
७-ईशविनय [ हरिदेव त्रह्मचारी 1 3 ी हे ह० नए ०० ० ३०
८-क्पा चर्ण परिवर्तत होसकता है [ प० छुलसीराम शर्मा 1 0 हा ३२
६-संखारभर के आर्यसमाजियोंसे प्रक्त | चि० हुर्गादत्त शर्मा ] ४ * ««* ३३१०-ऋग्वेद संहिता पर सम्मति [रामचिलासजी] :** «६ :* ** ३४
११-शिवद्त शर्मा की घ्तता (दाताराम पाठक) “४ *४ ** ञ५
१५-समाचाराचली * «* रूई. अबम #«४ जड़ * ३६त्राह्मणसवंस्व के नियम ।
2५०:
(१) श्राह्मणसबंख प्रतिमास प्रकाशित होता है।
(२) का सह्दित इसका वापिंक मू० २) और नगरके श्राहकोंसे २) २० दिया
जाता है।
(३ ) नमूने की एक प्रति ४) का टिकट आने पर भेजी जाती है ।
(४ ) भागामी अड्डू पहुंचजाने तक जो पिछला अड्डू न पहुंचनेकी सूचना देंगे उन्हें पि-
उल्ला अड्डू विना मुल्य मिलेगा । देर होनेपर ४) प्रतिके हिसावसे मू० लिया जावैगा।
(५ ) राजा रईस लोगों से उनके गौरवार्य चार्पिक ५) र० लिया जाता है !
(६) पता अधिक काल के लिये बदलवाना चाहिये थोड़े दिनोंके लिये अपना प्रवन्धकरना च्यहिये। ता
(७ ) विज्ञाएन एक ऐजले कम छुपाने पर एतिलाइन ४)॥ तीन मास तक ४)। ६ मास
तक ४) लिया ज्ञायगा | *(८ ) एकवार १ पेज्ञ पूरा छपाने पर ३) तीन माप्त तक ८) ६ मास तक १७४) जौर १
वर्ष तक छपाने पर २७) होगा | '
(६ ) विज्ञापन वदाई एक बार की ८) रप्या होगी. शश्लील और मूठे विज्ञापन
नहीं बादे जायगे।
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