आराजि बोजि | Aaraji Boji

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
11 MB
कुल पष्ठ :
527
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)प्रथम पा5--स्वरमोंगोल भाषा में सात स्वर हैं । आ ६ उ डर ए ओ ओ। इनफा क्रम नागरी से भिन्न
है । प्रत्येक स्वर के तीन रूप हैं---आदि, मध्य तथा अवसान ।आदिझहूप मध्यरूप अवसानरूपआ | जो तक <््प-2ए् के ने का हनन
डर जो +>
व हर च्| ० टउच्चारण&
६54... 04... ४४...लिखित भाषा में हस्व तथा दी का भेद नही दिखाया जाता ।आ विवृत उच्चारण का द्योतक है, दीर्घत्व का नही | इसी प्रकार ए ओ आओ, जो संस्कृत में
दी्घ माने जाते हैं, वे मोगोल मे कभी ह्ृस्व तथा कभी दीघ॑ उच्चारण किये जाते हैं ।यद्यपि देवनागरी मे हमने छस्व इ उ उ का प्रयोग किया है, उच्चारणावस्था में वे कभी हस्व
तथा कभी दीप॑ होते हैँ ।इया इये मे आ तथा ए सदा दी उच्चारण होते हैं। आगा आगु एगे एग॒ मे द्वितीय स्वर आ
उ ए पर सदा दीघं बोले जाते हैं ।दीघ स्वर का निर्देश करमे के लिये मोगोल लिपि में कभी २ स्वर दो बार लिखा जाता है---
बुउ (त्तोप)-बू । यह निर्देश विरले शब्दों में किया जाता है ।उ तथा ओ का उच्चारण विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है । ये तालव्य उ ओ कहे जा सकते
हैँ। जिद्दा को इ की स्थिति अर्थात् तालु मे रख कर ओप्ठो को उ की स्थिति में रखने अर्थात् गोल
करने से उ की ध्वनि बनती है । इसी प्रकार जिल्ा को ए वी स्थिति मे तथा ओष्ठों को ओ की स्थिति
मे रखने से ओ की घ्वनि बनती है। ,ओ का उच्चारण कभी सामान्य हिन्दी ओ भौर कभी हिन्दी “और में आने वाल़ी विवृत ओों
ध्वनि के समान होता हैं।है, २७)
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