प्रभु - पूजा (बच्चों का खेल ) | Prabhu - Puja (Bachcho Ka Khel)

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
0.63 MB
कुल पष्ठ :
33
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)न: _ पाक! क्रय विन सका -2.. का. नाना णव-णणणणणकट गकाणएय कायल गज बा क-रिककय। अ-कणणणणणणााटााीएतएतल्एएए”) फल फाए क अप्अकज॑ देह दिक्खसिक्खा, कम्मक्खयकारणे सुद्धा ।२६।
(बोघपाइड)
अथ-ज्ञानमय संयम से शुद्ध वीतराग जिनपिंब होती
दे जो कमं-नतय का कारण, शुद्ध दीक्षा और शिक्षा देती है ।
प्रथम तो तारण भाइयों के कहने के अनुसार आपने
श्रीमद्भगवत् कुन्दकुन्दाचायं के ग्रन्थों को उल्टा पलटा
और फिर भी आपकी निगाह प्रोध पाहुड़ पर पड़ी जिस
में उक्त वन है । इससे स्पष्ट ज्ञात होता है कि इसके
पहिले झापने कभी कुन्दकुन्दझ्ाचाय कृत ग्रन्थ नहीं देखे
थे ओर अब देखे तो भी अपूरे । मात्र बोध-पाहुड पर
आपकी दृष्टि पढ़ी तो बहीं आप को उपरोक्त दो सार-
गर्पित बातें जिन-घिंघ और जिन-प्रतिमा का
यथाथ स्वरूप मिल गया और यदि झ्ाप सारे ग्रन्थ का
नियमित अध्ययन करते जाते तो झाप को अपने इसी
लेख में यह लिखने का कष्ट न करना पड़ता कि “' मूर्ति-
पूजा करने से मिथ्यात्व का बंध होने का उन्लेख उन्होंने
भी नहीं किया है ” ।ना बा भ् जलन बह सा जम न. के जन बगल. िनाणय कनर या नगनाशाााशारला
न की न जा ना वववययालदादददयददययलकाययदवययाययदवददददवयददावदाधसवकाददयदयददददददववयदददवयदददयाववनक 1(६ १० )
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