पातञ्जल योगदर्शन तथा हारिभद्री योगविंशिका | Patanjal Yogadarshan Tatha Haribhadri Yogavashika

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
3 MB
कुल पष्ठ :
228
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)[६]वर्णन बेदका शरीर मात्र है। उसकी आत्मा कुछ और ही
है-बह है परमात्मचिंतन या आध्यात्मिक भार्वोका आवि-
प्करण । उपनिषदोंका प्रासाद तो श्रह्मचिन्तनकी वुन्याद पर
ही खडा है। ग्रमाणविषयक, प्रमेपचिपयक कोइ भी तस्व-
ज्ञान संबन्धी स्जग्रन्थ हो उसमें भी तत्वज्ञानके सांध्यरूपसे
मोच्का ही वर्णन मिलेगों। आचारविषयक सत्र स्एृति
आदि सभी ग्रम्थोंमें आचारपालनका झुख्य उद्देश मोत्त ही१ वैशेषिकद्शन अ० १ सू० ४--
धर्मेविशेषभ्रसूताद् द्ृज्यगुणकर्मसामा[न्यविशेषसमयायानों
पदाथौतां * साधम्यवैधम्यौम्यां तत्त्वज्ञानान्िःभयसम् ! ||
न्यायद्शेन अ० १ सू० ९--
प्रमाणप्रमेयर्सशयप्रयोजनदृशन्तसिद्धान्तावयवतक निणे-
यवादजल्पवितण्ड्वेत्वाभासच्छलजातिनिप्रदस्थानानां. तक्व-
झानाक्निःभेयसम् ||
सांख्यदर्शन अ० १--
अथ त्रिविधदुःसाटन्तनियत्तिर्त्यन्तपुरुपार्थ ॥
बेदान्तद्शन आ» ४ पा० ४ सू० २२--
अनावृतिः शब्दादनावृत्ति; शब्दात |
जैनदशेन वसस््ताय अ० १ सू० १--
सम्यग्द्शन्तानचारित्राणि मोक्तणागंः ||
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