सप्ततिकाभिध षठ कर्मग्रन्थ | Saptatikabhidhah Sastha Karamagranth

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Saptatikabhidhah Sastha Karamagranth by वीरशेखर विजय - Veershekhar Vijay

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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१२] सप्नतिका मिथे पष्ठे कमेग्रस्थे दे पं दि छ छ. | दुगोदए मगा १२ 8 | ६५५४ | एक्कोदए भगा ११ | _ |३|३| १ ३|९ एवं चड्बीसा । १ |३|३| १ ३१ एन चड्वीसा ४०+भगा २३ इस मोहरायसेन्ले चालीसकुडंब ४०वग्ग किछ भिन्चा | बग्गे बग्गे यू तहा चउबीसकुडबिया अत्यि ॥५९॥ ७८5) [७६] तेहि य जगडिज्जंत सब्बजगं कलकलेह अणवरय । 'मोतुमपमचसिद्धा इय एवं मोहिया जीवा ॥६०॥ (७७ [७७] “उदयपया य कुड वी माणुसरुखा य इत्थ किल विदा | सूरा ये पयहमेया इयरि अमखा सुणेयल्वा ॥६१॥ (० [७८] | गुणठाणा । सिच्छ० | सासण० | सिस्स० | अधिरय० अत २२ २१ १७ उद्यठाणा ४] ८ । ६ १० | ७ [६ ८ 8. चड्बीसिया १|३| ३ ग (९ १ १३३१ चडउबीसियसखा पर छ छ प्र | गा अं गा 2 50 धर ४५६७ छ [५ & |७ ४४ | २१|१|१|! १ ० जि है. हुं |३।३ १ (१९ [९ १९४ ३२१ १ ८ घर रु 3डदयपए पयर्विद्सखासाह--- १ ऊुत्तु अ०? इति 1५ 10. प्रतो। ९ “उदयपयपयक्कुडु वी” इति 1/ 1) प्रो ६३ 1 7 ग्रतावय पाठ , ट. प्रत्तिप्रेसफ्रोप्या चास्ति |




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