गिरिधर रामायण | Girdhar Ramayan

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Girdhar Ramayan by श्री जयप्रकाश बाबू - Sri Jayprakash Babu

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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' गिरधर-क्ृत रामायण २छ पद्म-पुराणे प्रसिद्ध कहावे; पद्म रामायण नाम छे, बगदाल्व ऋषिए करी छे, आश्चर्यपूरण काम छे । १२ । वक्की धर्मराजाएं करी, ते धर्मं-रामायण खरी, एम अनेक कवि आगे थया, तेणे रामायण घणी विस्तरी । १३ |, अपार गुण रघुवीर तणा, ते पार को पामे नहि, बुद्धिता अनुसार प्रमाणे, वर्णवी कविए कही । १४। भूमि रजकण, गगन तारा, बिंदु घन जाए गण्या, पण माप-संख्या थाय नहिं, छे अपार गुण रघुवीर तणा | १५ सुधा जरसिंधु भर्यों ते, कहो केम पिवाय ? एक चंचु जछथी तृषा वामे, पक्षी सुखियों थाय। १६। एम करूं आदर अल्प बुद्धे, कहेवा रामकथाय, क्‍ अंतरजामी कृपा: करजो, ग्रंथ प्रण थाय॥ १७१ सहु कविने पाये नमुं, कर जोडी माशुं मान, बाछृूक जाणी दया आणी, देजो हरिगुणदान | १८। में जो रामायण (उपलब्ध) है, वह अब अरुण-रामायण (कहलाता) है। ११५। पद्म पुराण के अन्तर्गत जो प्रसिद्ध रामायण कहा जाता है, उसका नाम पद्म-रामायण है। “बगदाल्व ऋषि ने जो (रामायण) तैयार किया, वह आश्चयेंपूर्ण कार्य है। १२। तदनन्‍तर धर्मराज ने जो रचा, वह धर्म-रामायण अच्छा है। . इस प्रकार पूर्वेकाल में अनेक कवि हो गये । उन्होंने रामकथा का बहुत विस्तार किया.। १३। रघुवीर राम के ग्रुण अपार (अयथाह) है। उसका पार कोई नहीं पा सकता। (इसलिए अपनी-अपनी ) बुद्धि के अनुसार प्रमाण मानकर कविओं ने वर्णन कर कहा है। १४। भूमि के धूलि-कण, आकाश के तारे, बादल से गिरनेवाले जल-कण गिनाये जा सकते है। पर मापने (गिनने) के लिए (ऐसी) कोई संख्या ही नहीं है, जिससे रघुवीर राम के गुण नाप या गिनाये जा सकेंगे--इतने अनन्त है रघुवीर राम के गुण | १५। अम्रत समुद्र में - भरा हो तो कहो, उसे कैसे पिया जाए ? एक चोंच भर जल से ही प्यास कम होती है (बुझती है) और पक्षी सुखी हो जाता है।।१६,।- इस प्रकार में अपनी: अल्प बुद्धि के अनुसार रामकथा कहना , आरम्भ कर. रहा हूँ । अन्तर्यामी भगवान्‌ कृपा, करे और यह ग्रन्थ पूर्ण हो जाए 1१७ । सब कवियों के चरणों का नमन कर, मैं हथ जोड़कर (उनसे) विशेष सद्भाव की याचना करता हूँ कि मुझे बालक समझकर (मुझपर) दया करो और हरि के गुणों का--उन्हें समझने की योग्यता का-दान दो | १८७। हरिनाम




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