कल्याण बालक अंक | Lankan Balak Aank

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
632 MB
कुल पष्ठ :
908
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)दुर्गति-नाशिनि दुर्गा जय जय, काल-विनाशिनि काली जय जय |उमा रमा ब्रह्माणी जय जय, राधा सीता रुक्मिणि जय जय ॥साम्ब सदाशिव, साम्ब सदाशित्र, साम्ब सदाशिव, जय शंकर ।हर हर शंकर दुखहर सुखकर अघ-तम-हर हर हर शंकर॥
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे । हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे ॥
जय-जय दुर्गा, जय मा तारा | जय गणेश, जय शुभ-आगारा ॥जयति शिवा-शिव जानकिराम । गौरी-शंकर सीता-राम ॥
जय रघुनन्दन जय सिया-राम । ब्रज-गोपी-प्रिय राधेश्याम ॥
रघुपति राघव राजा राम | पतितपावन सीता-राम ॥ज्् गणेशका स्मरणकुमति निवारनकों, विपति विदारनकों,डारनको जेतो जग-अजल पसारों है।
कहै “रज्ाकर! कद्दति गिरिजा यों नाथ,हाथ परयो रावरे गजानन ही बारो है ॥
दिन-रैन चैन है न सैन इहि उद्यमर्मेनेकडु न दम पावै रंचक विचारों है।
जारी किन कंत नैन तीसरे दुरंत सबे,पकदंतकों ही अयै बालक हमारो है॥--ऊविवर “रक़ाकर!आरतमो के जय जय विश्वरूप हरि जय | जय हर अखिलात्मन॒जय जय ॥ | गा
बिदेशर्म ३०. गौरीपति हक विदेशमें
(५५ कल्कि). जय विराट जय जगलते | गौरीपति जय रमापते ॥ | (१३५ शिकिक्त)सम्पादक--हजुमानप्रसाद पोद्दार, चिम्मनछाल गोस्वामी, पम्० ए०, शास्त्र
मुद्रकअकाशक--घनइयामदास जालान, गीताप्रेस,खआार्षिक खुल्य ) जय पावक रवि चन्द्र जयति जय । सत्-चित्-आनँद भूमा जय जय || [_इल अडका
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