ठोस होते हुये | Thos Hote Huye

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
971 KB
कुल पष्ठ :
147
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)ऊपर से तुमने चटक चूड़ियाँ भी
पहनी थीं ।
चेहरा तुम्हारा स्वयं ही
इतना स्निग्ध और साफ़ है
कि कोई उसे देखकर ही “
फिसल सकता है ।
ऊपर से तुमने हल्का मेक-अप
भी किया था---
होंठों पर हल्की लिपस्टिक,
आँखों मे महीन काजल
माथे पर छोटी-सी बिंदी !
कुल मिलाकर,
ने सही विश्व-शुन्दरी !
पर तुम उस मेनका सदृश तो थी:
जिसने विश्वामित्र को
मोह लिया था ।
कलर-इलाइंडनेस
आसमान का रंग कंसा है ? '
“नही मालूम 1
पूर्णिमा का चाँद कंसा है ?
“नहीं मालूम ।!
“फिर तो तुम्हें यह भी नही
मालूम होगा--
इस गहरी नीली साड़ी में तुम
स्वच्छ निरभ्र आकाश का
भरा-पूरा चाँद नज़र आती हो,
और आस-पास का सब कुछ
वहुत-बहुत अधूरा लगता है ।'
सम्मोहन / २३
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