श्रीमद् भगवत गीता भाषा | Shrimad Bhagawat Geeta Bhasha

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutSwami Kishordas
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
13 MB
कुल पष्ठ :
240
श्रेणी :
हमें इस पुस्तक की श्रेणी ज्ञात नहीं है |आप कमेन्ट में श्रेणी सुझा सकते हैं |
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about स्वामी किशोरदास - Swami Kishordas
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)रिफंड - पक ककहर कं 12, ..
भी जाता है ! अन्तवंत है ! है अर्ज़न तू इनको संहार । हे श्रेष्ठ द
- अजुन जिनकी इन्द्रियों के सुख 2 ओर हु!ख अपनी निश्चलता
से चलायमान न कर सके 5 लिन््हीं रुप ने अम्रतपान किया है.
... सोई पुरुष अमर हुए हैं। हे अर्जन ! यह जो समस्त देह में
.. आत्मा व्यापा है तिसको तू अविनाशी जान ! यह किसी के
कद्दे मारा नहीं जाता। यह अन्तवंत है शरीर उपजते भी हैं. और विनाश भी होते हैं हैं और आत्मा नित्य है। अमर है फिर.. कंसा निराहार है. हा खाता पीता नहीं ओर आत्मा कीमर्यादा भी नहीं कि कितनी हैं इस कारण है अजुेन युद्ध करके
कोई कहे अम्मक को मैंने मारा है, सो वह दोनों कुछ नहीं
सममभते नाही मरा ओर न किसी ने मारा हे आत्मा केसा है ।
User Reviews
No Reviews | Add Yours...