प्रिथीराज राठौड़ | Prithiraaj Raathaur

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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जीवन-वृत्त वंश-परम्परा बीकानेर राजवंश के संस्थापक राव बीका से चौथी पीढ़ी में (बीका-लूणकरणें जेतसी-कल्याणमल) अकबर के समकालीन राव कत्याणमलर हुए । कल्याणमल के ग्यारह पुत्र थे जिनमें से चार--रायर्सिह रामसिंह प्रिथीराज तथा सुरताण-- उनकी सोनगरा वंश की रानी से उत्पन्न हुए थे । यह रानी अखैराज सोनगरा की पुत्री भक्तिमती थी । गो० ही० ओझा ने कर्मचन्द्र बंशोत्कीरलेंनकं काव्यम्‌ नामक संस्कृत प्रंथ के उल्लेख से बताया है कि इस रानी का नाम रत्नावती था । शेष पुत्र (माण अमरा गोपालदास राघवदास डूँगरसी भाखरसी भगवानदास) अन्य रानियों से उत्पन्न हुए थे । पुत्रों की सही संख्या के विषय में पृथक्‌-पृथक्‌ धारणाएँ हैं। प्रिथीराज का जन्म मार्गेशीर्ष कृष्णा प्रतिपदा संवत्‌ १६०६ को हुआ था । प्रिथीराज के दो पुत्र--सुदर्शन (सुन्दररासिह) और गोकुलदास--हुए। इनकी जागी र भूतपूर्वे बीकानेर राज्य के गाँव ददरेवा (जिला चूरू) में थी । इनके वंशज प्रिथीराज वीका कहलाते हैं। गौरीशंकर हीराचन्द ओझा ने अपने बीकानेर राज्य का इतिहास में इनका वंश-वृक्ष इस प्रकार दिया है--प्रिथी राज सुन्दरसेन (सुन्दरसिह्ट) केसरीरसिंह विजयसिंह छनर्सिह जीतसिंह मुनकसिंह कुशलसिंहू लूणकर्ण सूरजमल हर्रिसिह गणपतसिंह तथा मेघरसिह । संवत्‌ १७३९२ के एक उल्लेख में सुदशंन के तीन पुत्र केसरीसिंह सचसाल तथा मानसिंह और केसरीसिह के फतहसिह व हरनाथ बतलाए गए हैं । गोकलदास के पुत्र जगतसिंह माधोर्सिह और नाहरखान (जो बादशाही फ़ौज से लड़े) लिखे गये हैँ । वैवाहिक जीवन जनश्रूतियों के अनुसार प्रिथी राज के तीन विवाह हुए थे । इनकी पहली पत्नी जेसलमेर के रावल हरराज की पु्नी लालाँदे बताई जाती है। हरराज की एक पुत्री गंगा प्रिथीराज के बड़े भाई महाराजा रायसिंह को ब्याद्दी थी तथा




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