मैत्रायणी संहिता | Maitrayani Samhita

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Maitrayani Samhita by डॉ० वेदकुमारी विद्यालंकार - Dr. Ved Kumari Vidyalankar

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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श्प १०. उक्थयग्रह घवग्द्द ऋतुग्रह ऐन्द्रानग्रह बेएवदेव ग्रह माध्यंदिन सवन (१५४३)० णुक्-मन्थी आग्रायण और उक्थूयग्रहों का पुन- ग्रहण मरुत्वतीयग्रह सवनीय पुरोडाश-यजन मरुत्वती यग्रह-होग माहेन्द्रेग्र ह तुतीय-सवन (१४४)-ण आदित्यप्रह आप्रायण-उवबधूय का पुनर्प्रहण सवनीय-यजन साधचिभिग्रह चैएवदेवग्रह सीौम्य चरु पात्नीवतग्रह हारियोजन ग्रह अति- ग्राहयग्रह पोडशीग्रह दघिग्रह आदाभ्य और अंशुग्रह पश्वे-कादशिनी द क्षिणा-होम समिष्ट यजुहोम अवभूथ काम्य पणुयाग उदवसा- नीयेप्टि (४) अ्निप्टोम के अवान्तर भेद (१४६) उव्थूय अतिराघ्र और पोडणी सोमयार्गों के अन्य भेद वाजपेययाग १५१० काल देखता-हुवि यजन-घिधि प्रात सवन माध्यं-दिन-सवन रथधारोहुण रथ दौड़ सपा रोहण अन्नहोम अभिषेक ग्रहहोम पशुयाग तुतीय-सवन राजसुययाग १४५५- काल देवता-हवि () यजन-विधि (१६१)-- नेक्रत-आनुमत इप्टि पाँच विशिष्ट हुवि- यगि . आप्रायणोध्टि . चातुर्मास्ययाग इन्द्रतुरीयाग भपामार्गहोम पंचेध्यीय होम देविकाहवियागि त्रिपंयुक्त हविर्यागि रद्नियों की हवियां विशिष्ट हृवियगि (व) दीक्षणीयेण्टि (१६५)-- मेत्रावाईस्पत्य चरु देवसुव हृथियां




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