बौद्ध साहित्य की सांस्कृतिक भलक | Bauddha Sanhitya Ki Saanskritik Bhlaka

Bauddha Sanhitya Ki Saanskritik Bhlaka by बुद्धा - Buddha

लेखक के बारे में अधिक जानकारी :

No Information available about बुद्धा - Buddha

Add Infomation AboutBuddha

पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

(Click to expand)
् उदाइरण तक मिल जाया करते थे | उदान के कंतिपय मसंगों एवं थेर तथा थेसी गाथाओं की एकाघ कथाओं से भी हमें इस बात की युष्टि होती जान पढ़ती है । . भगवान्‌ बुदद का जीवनादर्श अत्यंत भव्य श्र उदात्त है तथा उनके झयुपभ व्यक्तित्व की सुंदर प्रभाव भी जन-साधारण पर बिन पड़े नहीं रद सकता श्र यह बात बौद्ध धर्म के कथा-साहित्य का अध्ययन करने वाले अ्रत्ये+ प।०८+क के सामने उसके पृष्ठ-प्रष्ठ पर प्रमाणित होती जान पड़ती है । अतथश्व कुछ लोगों की समझ में यह एक स्व।भाविक प्रश्न उठ सकता. है कि वे सारी बातें लॉक- जीवन के स्तर तक कभी क्यों न पहुँच पाई क्यों नद्दीं उनके झ्राधार पर कभी किन्दीं लोक-गीतों का निर्माण डुश्रा क्यों न कभी उनके विक्धि सनोरम दृश्यों को किन्दों लोक-नाट्यों में स्थान दिया मया था क्यों न उनके प्रसगों की प्रेरणा में कभी किन्दीं लघु-कथाश्रों वा कद्दावतों की ही सष्टि की गई १ इसका एक सीघा-सादा अप९ तो इस प्रकार दिया जा सकता है कि यदद कथा-सादित्य.स्वयं लोक-- जीवन के स्तर से कुछ भी दूर नद्दीं दे । इसकी मूल-भाषा पाली कभी लोक-भाषा के पद पर श्रासीन रही है इसमें लोक-गीतों का स्वर स्पष्ट सुन पढ़त। है यदद पहले मोखिक सादित्य के रूप में दी अचर्थित था तथा इसके रचयिताशओं का कहीं पता भी नहीं चलता | इसे इसके वतमान संभद्दीत अनुवादित एवं प्रक।शित रूप में देखकर हमें शा इसका मूल रूप विस्मृत हो जाया करता है | इसके सिवाय जिन लोक-गीतों झ्रादि से इम श्राजकल परिचित हैं वे प्राय प्रादेशिक भाषाओं में उपलब्ध हैं जिनका उद्यकाल साधा- रणतः दमारे इतिहास के पूबभध्यकाब से कभी पइले नददीं पड़ता और संयोगवश यह्दी वह युग भी. ६र/वा ला सकता है जब बौद्ध कम का यहाँ प्रत्यक्ष वास दीख पड़ने लगा था श्र जब उक्त सारी बातों के क्रमशः लुस होते जाने की दी श्रधिक लंभीविये। थी । लिन




User Reviews

No Reviews | Add Yours...

Only Logged in Users Can Post Reviews, Login Now