जवाहर लाल नेहरु बेनकाब | Jawahar Lal Neharu Benakab

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Jawahar Lal Neharu Benakab by हंसराज रहबर - Hansraj Rahabar

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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उचपन ग्रौर शिक्षा १७ से एणिया श्र हिन्द्स्तान को श्राजाद करने के भावों में डूबा रहता था | मै बहादुरी के बडे-बढे मनसूवे वॉघा करता था कि कंसे हाथ मे तलवार लेकर मै हिन्दुस्तान को झ्राजाद कराने के लिए लड़ूगा । श्रौर हम देखेंगे कि उन्होंने सिफ॑ मनसूवें ही वाँधे तलवार की तरफ हाथ कभी नहीं बढाया बल्कि तलवार उठाने का हमेना विरोध ही किया । मई १६०४५ में उन्हे श्रागे पढ़ने के लिए इंगलेंड भेज दिया गया भर वहाँ वह लदन के हँरो स्कूल में भर्ती हो गये । इस स्कूल में छज लार्ो श्रौर रईसो के लड़के पढते थे । हिन्दुस्तानी राजे-महा- राजे ग्रौर नवावों के लड़के थी प्राय यहीं दाखिल होते थे । जब जवाहरलाल नेहरू भर्ती हुए थे तब भी चार-पॉच हिन्दुस्तानी लड़के यहाँ पढ़ रहे थे । उनमे एक महाराजा बड़ौदा का लड़का था जो जवाहरलाल रे बहुत आगे था । दूसरा लड़का महाराजा कपूरथला का बा बटा परमजीतसिह था । उसका स्वभाव बड़ा ही विचित्र था । लड़के उसके तौर-तरीको का सजाक उडाते तो वह चिढ़कर थमकी देता कि जब तुम कपूरयला श्राश्मोगे तब मैं तुम्हारी खबर जगा । इस पर उसकी श्रोर थी हँसी उड़ती 1 घर से टूर श्रौर झ्जनदियो के दरम्यान रहने का जदाहरलाल का यह पहुला मौका था । पहुले-पहल तो उनका मन वहाँ सही न्ंगता था । पर धीरे-वीरे अ्रपने ग्रापको वातावरण के अनुकूल न लिया । रकूल के कामों रे झलादा वह वाहुर को दुनिया में भी दलचरपी लेने लगे । उन दिनों हवाई जहाज उड़ना युरू ही हुथा था । यह वह समाना था जब राय घदस ने हुदाई जहाज का भ्रविप्कार किया या । दिन्ान के शादिप्यार में योर खासगर हवाई जाहाजों में जदाहरनास की गहरी दिलचस्पी थी । उन्होंने एक बार जोग में




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