सिद्धान्त और मनोविज्ञान | Siddhant Aur Manovigyan
श्रेणी : मनोवैज्ञानिक / Psychological

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
5.68 MB
कुल पष्ठ :
333
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)मानव का दिकाप्त-करम भोर शिक्षा का स्वरुप श्ह. आवश्यकतानुसार नियन्यण करना झसम्मद होता है। इसी कारण भाज सविधिक शिक्षा को झधिक से झंधिक सवाँगपूर्ण बनाने का प्रमत्त चल रहा है । (पा) संविधिक शिक्षा--अविधिक सिझ्ा जिसमें केवल प्रत्यक्ष अनुभवों द्वारा ही धालक पर प्रभाव पदता है उसके स्पान पर सविधिक शिला प्रत्यल्ष घौर प्रत्यक्ष दोनों प्रकार के बालक पर प्रभाव डालती है। इस प्रकार से भविधिक शिक्षा को कंमियों को सविधिक शिक्षा पूर्ण करती है। यधपि यह सत्य है कि भ्विधिक शिक्षा प्राइलिक स्वाभादिक भौर प्रारम्भिक है फिर भी यह भाज के विकसित समाज की झावश्यकता की प्रति करने में सब था भसमये है । यहीं कारण है कि समान भाज सुनियन्तित सविधिक शिक्षा का सहारा लिए हुए है । फिर भी यहं कभी नहीं सम मना चाहिए कि इस प्रकार भविधिक शिक्षा समाप्त हो जावेगी वह तो सूप्टि के प्रारम्स से भ्ारम्भ हुई है मोर जब तक सर्दिधिक शिक्षा चलती रहेगी तब तक उसे सहायता देती रहेगी । इसके सद्दारे के दिना सचिधिक शिक्षा प्रपना कार्प पूर्ण नहीं कर सकेगी । ाज को समस्पा--छात्र भाज स्कूल में केवल छ घंटे ही रहता है भौर घेप रामयं वह स्कूल के दाहर गुजारता है । इस प्रकार सविधिक शिदा के थ धंटे के प्रमत्द के भ्रतिरिक्त भठारह पंटे उसकी विधिक शिक्षा रहती है। बालक के इस मठारदू घंटे के जीवन पर नियर्दण हो सके भोर उसे सुधरा जा सके तो विद्यालय का कार्प बढ़ा सरस बन राकता है । परन्तु प्ररन यद है कि बया भविधिक शिक्षा के क्षेत्र को नियस्त्रित किया जा सकेगा ? वर्तमान दा में ऐसे भ्नेकों प्रयसन चल रहे हैं । परन्तु उनसे प्राप्त घनुमवों से यू स्पप्ट हुपा है कि इस क्षेत्र पर नियरवश प्राप्त कर लेना सम्भव नहीं । इसी कारण शिक्षा-विशेषज्ञों था मत है कि सविधिक शिक्षा में ही सच्चे षों में प्राण-प्रतिष्ठान किया जाना चादिए। सारोश प्रस्तावना--मानद के दिकात हो चार भवस्वाएँ मानो जाती हैं । दिशा को भी हुए इन चार भागों में समन सकते हैं (१) शिकारी मानव को शिक्षा । (२) पशुपालक भानद को शिक्षा । (१) कितान मानव को सिझा 1 (र कल-पुपो सानंश की शिक्षा 1 आरम्मिक दो दशासों में झविधिक शिसां का घायिरत्य एवं घन्तिम दो ददाों में सरविधिक शिक्षा कर भाधिरत्य--दिंकषा के दो रदरूप 2-ण (प) भदिधिक शिक्षा । भा) सर्विविक दिक्षा ३ सर्िषिक शिक्षा धोर झर्िदिक रियसा दोनों एक-दूसरे दो दुरक हैं । भाग को समश्या--्रिथिक रिप्ता पर निपस्त्रण सम्मद मे होने हे
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