ये आदमी ये चूहे | Ye Admi Ye Choohe

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
426.28 MB
कुल पष्ठ :
176
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)न द्रव लि,
र एक हेसोलेदाद के दक्खिन में कुद,मील दूर, सैलॉमस नह पहाड़ी केपास श्ाकर बहने लगती है शोर उसकी पानों एक संकरे गड़े के कारण_ श्रोर भी हरा हो जाता है । इसे पानों में कुडड गर्मी भी होतीं है, क्योंकि
इस गहराई तक पहुँचने से पहले वढ पीली वालू के ऊपर, धूप में
चमचमाता हुश्रा, वदद कर श्राता है । नदी के एक ग्रंर सुनदले निचले
ढाल चक्कर खाते हुए, विराट पथरीले 'गैवीलन' पहाड़ों में खो जाते हैं,
पर घाटी की श्रोर नदी के किनारे-किनारे पेड़ों की पंक्तियाँ दूर तक चली
गयी हैं । उन में, हर बसंत के मौसम में हरे भरे श्रीर ताज़ा हो उठने
वाले, सरई के पेड हैं जो श्रपनी पत्तियों के निचले सिरों के पीछे शीत-
काल की बाद का. कूडा-करकट छिपाये रहते हैं । उनमें कुफे हुए
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