गुरु ग्रन्थ रत्नावली | Guru Granth Ratnavali

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Guru Granth Ratnavali by तरन सिंह - Taran Singh

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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कक थूब्म सीनं मिपादिउ घाटी दिख उठी उठृं उठमाछिशा ठिभा दै | जप नी नए मी मी वाहु ठाठव नगठि सी शठि पिन तच्ठा टै । छि हे धूपष दिसठ छिए उठ (8) पठभाउना डुवाछ मर है दिउ थुठठ मरी दे भाषटि मच नाश मच है डी मम ठाठव ऐनी छोर | (न) नीदठ रा भउद मधिभात घटा ै भठे मतिभाव चुबभ री धाछठा बठठ ठाठ घटीरा वै - चुबधि उन्नरटी चछटा ठाठव छिधिभा ठाछि (8) पचिभाठ भदध रा मीरठ छिए है नड पणठा पीठन्न प्रुठिभाठ 1 भठरताल भ्ि देख ठघीभातु । घर घछा भणिठि उप उठ | डंडा घारि भीपूउ छिउ चाछि। (न) छिन पेंपठ रा नीरठ पुधउ वठठ छटी थिंत म्पठ ठठ (1) भेपउ देछा मच ठप दृषठिगाशी दीचातु | (2) पेछ पवन रटिभा वा युद्ट 1 मिठेपु घाषि तथिशा मिठि प्ु्ि | (35) उठीगे भडि था वे मिठि एिय पंप ठाई दे ठेठि 1 (4) डिटु गुरू बीडें बरगाछि ठ ठष्टि | (5) मरा मधु मत्म पट बेंछी । पिभाठ वी बठदि घिडुदि । (6) वबठमी शाप शाधटी वे देने वे सुष्ि। उण्िठम ठठठगि छिंठ वाह मणिघिठ (वात ठगठब वात ठमरगा गठू भठनठ छेद) टी तचठा हिसें सेंट बचने मेपाछिउ बीडी ठे्दी ठिउ ठेम सी घग्टी वै। छिप दि ठान भावता शंडे ठाम वठिठी हे छिप मिपांउ दिन बठाएि ठाष्टे उठ 1 (९) ब्रेदछ प्र. ती अठुपी घपनीभउ हूँ प्रुभाठ वे 853 वठ मवरा थै ठग्ठव मच मदाठठताठा (५) ठीच रख चठ मे ठग डे रिपन्नि उेटे चठ ठग्ठब ठारे घाइ प्रठाडि । (९) बे पतन री मिठाउ भ्ेंध हू शउा बतरी थे प्रेठे भरपि सी पसिमिर्गाडि मिलें पु उठिभा (0 मव दिस पूंछ मेडि बेभ वठरी दे ुं घट पट शच्चिठि मठघ दिवठठि मी 1 (ए) पुढ़ इछ न्नाठ ठाछ भाचठत सी पग्ठो ठेटी वै चठि घिप्तठव डेठे ठाठ ठाछिया | (व) ने प्रठीठ दिस छिठिठी बठठ छी प्राठा वै छठठी बचे धुवरुठा डीब धुनठ सी ममठखा है वेर्िटि पिछट नी शिव उेठी घठीगा | मेछिछा मंछिछा दी डिंठ वाहु माठिघिठ (वाह ठाठब वृठू ठ्रगा तृतु भठनठ) सी वचठा दिखे प्घच दी वे पिपाचिउ बीडी ठट्टी घाटी ठै । छिप दिन ठग मापठा शडे ठाभ ठदिली हे हित मिपांउ छिद्ठू बठादे लेटे तठ | (९) पठााउमा ठिवडरि वै दिन से निठठ ठाठ भ्ँध ठिवडर्रि पु वे चुत ठादतु मेवे ठितवष्टि वा मेंणिठा 1 (न) माता विश्वठ पतभाउभा दिख वै पठ छिन हे तिभाठ हे प्रतुध वी उठ 1




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