रत्नभण्डार अर्थात ज्ञान रामायण | Ratna Bhandar Arthat Gyan Ramayan

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
2.38 MB
कुल पष्ठ :
92
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)झानरामायण ( श्प सजुप्य शरीरका महत्वसोतज्ु घरि हरि भजह्टि नजेनर 1 दोईं विपय रतिमन्द मम्द तर 11
कांच किराच चदलि शठलेद्दी । करते डारि परस मणिदेंढी ॥
रतन पाइ विपय भ्न देहीं । पलटि सुघाते शट चिपलेदीं ॥
__. जो सन्ुप्य शरीर पाफर इंशवर सजन न फर विपयोमें सन लगाते
हैं चहद मन्द, घुद्धि पारस मणि के घद्ले कांच को सरोदते 'पथया
झस्त देकर चिप उदरण करते हैं 1शिक्ता-सजष्य शरीर को पाकर श्र .कर्म करना ही जीयनका साफल्य है ||2
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