प्रतापी आल्हा और उदल | Pratapi Aalha Aur Udal

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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( १६ )विशाल राज्य-स्थापन-मदाराज चन्द्रवमीं का वर्णन पूब॑ ही आ चुका है। उन्होंने अपने वाहुवल से चन्देल रान्य की स्थापना की थी । उनके प्रधान सद्दायक बीर चिन्ठामणि थे । दोनो की आत्मा एक थी, परस्पर 'अमिन्न-दृदय मित्र थे। इन्हीं दो महान आत्मा ने मिलकर उस शक्ति के युग में विशाल राज्य स्थापन किया था ।.. चन्द्रवर्म के वाद वोरवर्मा राज्य का अधिकारी हुआ । उसने वढ़ी योग्यता से बहुत वर्षों तक शासन किया । उस समय चन्देरी की बढ़ी उन्नति हुई। नगरी सुन्दर तथा राजभवनों से पूर्ण हो गई । कला-कौशलों का प्रचार होनेलगा तथा व्यापार की वृद्धि हो गई । सबंत्र सुख-शान्ति का साम्राज्य फेल गया ।इसपम्रकार क्रमश: बज्चचमों, नन्दनवर्मा, जगवर्सी, 'और सूथेब्मा चन्देरी के राजर्सिंदासन पर बेठे। सूयेवमो ने बढ़ी उन्नति की । प्रजा का पुत्र के समान पालन किया तथा 'उनके सुख के लिये आवश्यक व्यवस्था की । सूयवर्मा का पुत्रमदन व्मों हुआ जिसने मदन ताल वनवाया, जो अब तक उसी नाम से प्रसिद्ध है ।मदनवर्मा का पुत्र कीर्तिवसो हुआ जिसने ्पने ,नाम से एक सरोवर बनवाया, जिसे लोग अवतक कीर्ति सागर के नाम से पुकारते है।




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