धर्म इतिहास रहस्य | Dharma Itihas Rahasy

Dharma Itihas Rahasy by रामचंद्रजी शर्मा - Ramchandraji Sharma

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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[ ४ 1] हुं महीं जानते कि बस १४ बंप के पश्चात्‌ ऋषि सूमि में मोवंश नष्ट हो जायेगा । हो ! सिंदयी जाति से जन्म लेने पर बार-बार घिकार हैं जवेकि हमारे बच्चे किसी के द्ाथ में दूध देखकर नदीदेपन से गिंदृंगिडा कर मांगते हैं. झौर इस अपने फूटे सुख से सिद्ककरे ही, संतोप नहीं करते वरन सारते-मारते मूर्चित भी कर देते हैं । इाय ! क्या इंससे भी बुरा कोई समय होगा जबकि इसारे प्यारे रोगी बच्चों के लिए कुछ भी नहीं सिंलता होगा । हिन्दू जाति | कितनी ये शर्मी और बेगैरती का स्थानदै कि द्‌_ बूंसरी से दो मोजन छुदवाने का भी यंत्र करेंती है घौर तुमसे गो माता की चरबी लगां विदेशी चखें भी न त्यांगा जावे । याद रख सुललमान गो बंध नहीं बन्द कर सकते यदद गोबंध तो काफिरों से दश्जू सीघा करने का' सर्वोत्तम उपीय॑ है | यंह तो उनका प्रिय भोजन घर व्यापार का मूल डे) थे तो उनके पांच, सूल सिद्धान्तों में से एक सिद्धान्त है ।'झो प्रमादी जाति ! निश्चय रखें बातों में झदिसा पंरमोधमः की पालन नहीँ ' होता ! इस घर्म के. पालन के लियें चुके झर्दिसा देवी के 'झागे सिर काट कर झंपने ही होथ, से मेट करना पंढ़ेगा ।, _. ' बाढे सूर्य से घर्फ़ के देखें बरंसने लगे पर यंद असंग्मव ' है कि ,अंगरेज गोबघ बन्द कर दें भला वे गोवध चन्द करके' अपने देनिंक साजन की धाप्ते करने के श्रज़ील की दूना खूत्य देकर उसकी हां हा क्यों करें । वे झपनी मेद॒ नीति को हाथ से क्यों खोचें । जिस पर * भारतवर्ष का ही नहीं:नहीं सारा साझ्नाउय स्थिर दै।। समको ' तो खहीं ' कौन सा कारखाना ऐसा है जिसमें गोबध की अावश्यकता । नहीं; ' भला ' जिस व्यापार के अय से जर्मनी से युद्ध ढेदा उसे कायर लोगों की 'प्रस- * बता मात्र, के लिये क्यों. चष्ट कंरदें । क्या वे विदेशीय के दास ' जइंदुआं के बराबर भी बुद्धि नहीं रखते 1




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