बौद्धधर्म - दर्शन | Bauddhadharma darsana
श्रेणी : दार्शनिक / Philosophical

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
54.1 MB
कुल पष्ठ :
778
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)(७) जिरोघ-समापत्ति -संक्लेश-ब्यवदान--विज्ञान का द्वितीय परिथाम मन--मन के बाय --मन का झालंबन--मन के संप्रयोग--झक्लिप्ट मन--अमन की संज्ञा-- विज्ञान का वृतीय परिणाम पड़ विज्ञान--विज्ञप्तिाजता--विज्ञप्तिमात्रता की विभिन्न व्यास्याएँ--विज्ञप्तिपात्रता पर कुछ॒झाक्षेप और उसके उत्तर-- जिस्वमाव की सचा--निःस्वमाववाद | उनविंश झव्याय 1 माध्यमिक नय प्रटथ-पद२ माध्यमिक दर्शन का मदत्व--माध्यमिक दर्शन का प्रतिपाद्य--स्वत उत्पत्ति के सिद्धान्त का खरइन -माध्यमिक की पक्षहीनता--माध्यमिक की दोषोज्ञावन की प्रणाली-- माध्यमिक स्वतंत्र अनुमानवादी नहीं--परतः उत्पादवाद का लणएडन--प्रतीत्य- समुत्ताद--बुदध देशना की नेवार्थता श्रौर नीताथंता--रसंदति की व्यवस्था--प्रमाण- इयता का खणशडन--लदय-लकषण का खरडन--प्रमाणों की श्परमार्थता--देतुवाद का खणडन--गति -गस्ता और गन्तब्य का निषेघ--झप्वब्य का. निषेघ--द्रष्ा द्रष्व्य और दर्शन का निषेघ--रूपादि स्कन्ों का निषेघ--अड् घातुझों का निषेघ-- रागादि क्लेशों का निषेघष--संस्कृत घर्मों का निषेघ ( संस्कृत पदार्थों के लक्षण का निषेघ--सस्कृत-लचण के लक्षण का नि्षेष--उत्पाद की उत्पाद-स्वरमावता का खणडन--श्नुसाद से प्रतीत्यसमत्याद का झविरोध--निरोध की निर्देतुकता का निषेघ )--कर्म-कारंक झ्रादि का निषेघ--पुदुगल के झ्स्तित्व का खणशडन--उपादाता और डपादान के झमाव से पुदूगल का झभाव--पदा्थों की पूर्वापर-कोटिशूत्वता-- दुःख की श्रसत्ता--र्सस्कारों की निःत्वमावता--माध्यमिक झमाववादी नहीं--संसर्गवाद खैंडन--निश्स्मावता की सिद्धि ( स्वमाव का लक्षणु--शत्यवाद उच्छेदबाद या शाश्वतवाद नहीं ) संसार की सत्ता का निषेघ--कर्म फल शोर उसके संबन्घ का घ--नबशिकवाद में कमे-फल की ब्यवस्था--झविप्रणाश से कर्म-फल की ब्यवस्था-- क्मफल की निः््लमावता--झनात्मवाद ( झात्मा स्कंघ से मिन्न या झमिन्न नहीं-- अनात्मतिद्धि में झागम बाघक नहीं )--तथागत के प्रवचन का प्रकार ( माध्यमिक नास्तिक नहीं हैं--तस्वामृतावतार की देशना )--तस्व का लघ्चचा--काल का निषेषध-- देठु-सामग्रीवाद का निेष--उत्पाद-विनाश का निधेघ--तथागत के झस्तित्व का विपर्यास का निष्षेघ-- वार झायं-सत्यों का निषेष-- लोकर्सबति-सस्य-

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