क्रिटिकल इवैल्यूएशन ऑफ़ नाबार्ड इन रूरल इकोनॉमिक्स विद स्पेशल रेफ़रेंस टू यू.पी. | Critical Evaluation Of Nabard In Rural Economics With Special Reference To U. P.

Critical Evaluation Of Nabard In Rural Economics With Special Reference To U. P. by आशुतोष शुक्ल - Ashutosh Shukla

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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10) लाभ नहीं पहुंचता है। बैंकों की लग्बी-लम्बी कागजी कार्यवाही एक ही कार्य के लिए दस बार दौडाने की अधिकारियों की आदत एवं घुसखोरी के व्याप्त भ्रष्टाचार से गरीब किसान को वित्तीय सहायता कभी भी समय से प्राप्त नहीं हो पाती थी और अत मे किसान वित्त की व्यवस्था या तो अपने व्यक्तिगत ग्रोतो से करता है या फिर साहूकार के चगुल में फसता है और आजीवन भर के लिए करण के दलदल मे फस जाता है। ग्रामीण साख सर्वेक्षण समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा कि हमारी वर्तमान बैंकिंग व्यवस्था पूर्णतया दोषपूर्ण है और ये कुल ग्रामीण वित्त की माग का मात्र ४९ प्रतिशत थाग ही पूरा कर पाते है और शेष ग्रायीण वित्त की माग की पुर्ति साहूकारो द्वारा या किसानों के व्यक्तिगत स्ोतो द्वारा परी की जाती है। साथ ही ग्रामीण साख सर्वेक्षण समिति की इस बात की सिफारिश की वर्तमान बैंकिग व्यवस्था मे आधारभूत परिवर्तन की आवश्यकता है बैंकिग व्यवस्था मे कुशल नियत्रण उत्तम समन्वय तथा सरल एवं लचीली बैंकिग व्यवस्था की नितात आवश्यकता है जिससे एक गरीब अशिक्षित किसान भी लाथानित हो सके और किसानो को साहूकारो के चगुल में न फसना पडे। बैंकिंग व्यवस्था मे व्यापक नियत्रण एव समन्वय स्थापित करने के लिए नाबार्ड की स्थापना की गई । चूकि नाबार्ड की स्थापना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण विकास एव ग्रामीण वित्त की पर्याप्त व्यवस्था करना है। जिसके लिए नाबार्ड के द्वारा व्यापारिक बैंको ग्रामीण बैंको सहकारी बैंको जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंको सहकारी सस्थाओ को एवं कोई वित्तीय सस्था जो ग्रामीण विकास मे लगी हो को पुनर्वित्त प्रदान किया जाता है। नाबार्ड के द्वारा बैंकों का पर्यवेक्षण भी किया जाता है जिससे उनकी कार्यप्रणाली पर नियत्रण रखा जा सके। नाबार्ड किसानों से व्यक्तिगत सम्पर्क का प्रयास भी करता है जिसके लिए क्षेत्र के ग्रामीण बैंक को यह जिम्मेदारी सौंपी जाती है जो कि एक कार्यक्म आयोजित करके किसानों से व्यक्तिगत सम्पर्क स्थापित करते है एव उनकी सलाह एव समस्याओ को नाबार्ड तक पहुचाते है ऐसे कार्यक्रमों का पूरा व्यय नाबार्ड के द्वारा वहन किया जाता है। इस प्रकार नाबार्ड ग्रामीण वित्त की पूर्ति करने का अधक प्रयास कर रहा है। जिससे किसानो को ऋण के दलदल से निकाला जा सके। तथा




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