बनारस मंडल में १८५७ का विद्रोह | Banaras Mandal Me 1857 Ka Vidroh

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Banaras Mandal Me 1857 Ka Vidroh by प्रकाश मोहन श्रीवास्तव - Prakash Mohan Srivastav
लेखक :
पुस्तक का साइज़ : 75.29 MB
कुल पृष्ठ : 237
श्रेणी :
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प्रकाश मोहन श्रीवास्तव - Prakash Mohan Srivastav

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थि ने बतलाएस आने के उपरान्त कहा था कि जब में बनारस सें ही जाऊंगा । वयोंकि यह पवित्र नगरी सार्वजनिक पठ बार यहां के हर ब्राहण का पुत्र मुफे छकषमण बार राम फ्रती है। मुगठ शासन काछ के अन्तिम कण में बनारस प्रान्त रुक राजा के अधीन था जिसे समाट के शासनादेश सें उपाधि मिठी थी । ऑआरगजेब की मृत्यु के तत्काछ शाद मुगठ राज्य की शक्ति अर बे उतरी होती गह आर प्रान्तीय अधिपत्ति व्यबदारिक रुप से स्वतन्त्र होने छें। बनारस जानपुर तथा गाजीपुर िछे मुर्तजा खान नामक सक दरबारी करें निरूधित किये गये थे जिसने उसे १७२२ में अवध के भव सादत खा को सात ठाख रुप में पट्टे में दे दिय पप्त करके ये गे के मीर रुस्तम अठी को बाठ ढाल रुपये में दे दिये गए र रुस्तम ने सम्पति की व्यवस्था रक ममिहाए ब्राहण मनसाराम को साँप दिया थो वर्तमान बनाए के सताझड़ पवार का ००लरासतरतिम तपपलेशकफालाफपरसतरवकक करिकरसक िसिककाएं ननलनरवातामता क् अन बनाएस न एवम मसरैधिदे आमद इजा फिसरें बरइमन छथ्णनों एामसस्तीला । पृष्ठ २८ |




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