राजस्थानी भाषा | Rajsthani Bhasha

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
6.46 MB
कुल पष्ठ :
96
श्रेणी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)घः राजस्थानी भाषा में जो सूल्यवान गचेषणा सम्पूण की थी उससे राजस्थानी भाषा की उत्पत्ति तथा विकास पर झर्रूतपूर्व प्रकाश डाला गया है । राजस्थानी की विभिन्न बोलियों में उपलब्ध मध्व-युग के साहित्य खास कर के डिंगल साहित्य प्राचीन गुजराती-मारवाढ़ी साहित्य अपभ्रश साहित्य--- ये सब राजस्थानी के इतिहास को निणुंय के लिये प्रधान उपजीव्य हैं । श्रीरामपुर के मिशनरियों ने गत इंस्वी शती के मारंभ में जो झनुवाद कु राजस्थानी बोलियों में किये थे वे भी विचारणीय हैं। चालू राजस्थानी पर ग्रियसंन का विचार विशेष महत्त्वपूर्ण है इस विचार की शैली को और भी पुष्ट करके) नह तौर पर भाषा-तत्त्व के सर्वांगीण दूष्टिकोश से झाधुनिक राजस्थानी की वर्णना की जरूरत है---सभी बोलियों से प्रचुर निद्शन संगीत होना चाहिये । पुरानी राजस्थानी उच्चारण-रीति रूप-तत्त्व और वाक्य-शोति के पूरे विंचार के साथ तेस्सिवोरी की शझ्ालनो- चना ऐसी महत्त्वपूण द्देकि इसे राजस्थानी (मारवाड़ी ) तथा गुजराती भाषा-तत्त्व की जुनियाद यदि कहा जाय तो अत्युक्ति नहीं होगी । भारत की झौर सब प्रान्तिक झाय॑ भाषा या बोलियों की न्यई राजस्थानी की भी कुछ विशिष्टताए हैं । राजस्थानी के सभी रूप-मेदों में पूणतया सर्वत्र नहीं दीखर पढ़ती हुई भी ये राजस्थानी दी की परि- चायक होती हैं । राजस्थानी ? हस नाम से ग्रियर्सन ने भौगोक्षिक संयोग के कारण और कुछ स्थूल विशिष्टिताओं के कारण जिन बोलियों या भाषाओं को एकत्र सूथ दिया था वे सचसुच दो प्रथक शाखाओं की हैं--एक पूर्व की शाखा जो पढ़ाँही हिन्दी से ( ज्जभाषा आझादि से ने ज्यादा सम्बन्ध रखती है झ्ौर दूसरी पश्चिम की शाखा जिसका सुजराती से मौलिक-संयोग है । थ्रियर्सन ने राजस्थानी बोकियों का वर्गीकरण यों किया हे --. 5] पश्चिमी राजस्थानी--इसमें ये बोलियां झाती हैं--जोधपुर की 3ि0का1087त या बद्दी राजस्थानी अधात् शुद्ध पश्चिमी मारवाड़ी ढटकी तथा थली और बीकानेरी बागड़ी शेखा-
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