जीवनी और संस्मरण | Jeevani Aur Sansmaran

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Book Image : जीवनी और संस्मरण - Jeevani Aur Sansmaran

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निर्मला जैन -Nirmla Jain

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विद्यानिवास मिश्र - Vidya Niwas Mishra

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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इस भू-भाग में अनेको जातियाँ एकत्रित हैं। तुर्की और तद्भाषा-भाषी जातियों की तरह यधपि ऐतिहासिक काल में बहुत-सी भाषाएँ और जातियाँ यहाँ आपस मे मिलकर एक हो गईं लेकिन दुर्गम पर्वतों और लोगों की वीरता के कारण अब भी बहुत-सी जातियों और भाषाएँ मिलती हैं । काकेशस यूरोप का नही बल्कि हमेशा से एशिया का अभिन्‍न अग रहा है। एशिया और यूरोप की वर्तमान सीमा काला सागर से शुरू हो काकेशस के उत्तर-उत्तर कास्पियन पहुँच फिर उसमे गिरने वाली उराल नदी से होती हुई उराल पर्वत-श्रेणी से मिल जाती है। गुर्जी (जार्जी) और अर्मनी लोग बहुत पहले ईसाई हो गए थे जिसमे उनकी वीरता से फायदा उठाते हुए उन्हे अपने प्रतिद्वद्वी ईरानियो के विरुद्ध खड़ा करने का रोमन साम्राज्य का प्रयत्न भी एक कारण था । सासानी ईरानियो के शासन को जब अरबों ने खतम किया तब भी कितने ही समय तक अर्मनी और गुर्जी बहादुर वही काम करते रहे जो कि भारत के पश्चिमोत्तर मे अरबों और तुर्कों के विरुद्ध पठान करते रहे। उन्होने कितनी सफलता के साथ मुकाबला किया यह इसी से मालूम होगा कि इस्लामी विजताआ न गुर्जियो और अर्मनियों को मुसलमान बनाने मे मफलता नहीं पाई । अर्मनी और गुर्जी जहाँ ईसाई होने मे पश्चिम की शक्तियां की ओर आशा लगाये रहते थे वहाँ कुर्द और तुर्क आदि मुसलमान हो जाने क बाद इस्लामी जगत से अपनी घनिष्टता मानते थे। शायद आज जैसा भाव उनमे कभी भी पैदा नहीं हुआ जब कि सभी काकंशम का पत्र मानते हुए अपने को भाई भाई समझते हो । आज काकेशस की भिन्न-भिन्न जातियो का आपसी सधर्ष अतीत की बात हो गई है सभी जातियों की भाषा और सस्कृति के अनुसार अपने स्वतत्र या स्वायन गणराज्य है जहाँ वह अपनी जातीय इकाई को अक्षुण्ण बनाये अपने को सोवियत की विशाल महाजाति का अग मानती है। उनके ऐसे परिवर्तन तथा सुख-समृद्धिपूर्ण सास्कृतिक जीवन के निर्माण मे जिस पुरुष का सबसे बडा हाथ है वह इसी काकंशस भूमि में पैदा हुआ था। 2 जन्म काला सागर क नातिटूर काकेशस के पश्चिमी भाग मे गुर्जी नोगों का प्राचीन नगर तिफलिम (त्विलिसी) है जिसके पास गोरी कस्वा है। इसी कस्बे के पास दिदिलियो नामक छोटा-सा गाँव है जहाँ पिछली शताब्दी के मध्य मे बिसारियोन नामक एक गरीब चमार रहता था । उसके ज़श का नाम जुगशविली था । बिसारियोन जूते बनाने क॑ साथ-साथ कुछ खेती भी कर लिया करता था लेकिन दोनो से भी उसका गुजारा मुश्किल से होता था । बि.सारियोन ने गम्बरयोली गाँव के अर्धदास गुर्जी गेलादुजे की लडकी एकातेरिना (केथधरिन) से ब्याह किया जिसके बारे मे मालूम है कि वह बड़ी सुन्दर काली बडी आँखों तथा गम्भीर मुखमुद्रा वाली स्त्री थी । बिसारियोन को अपना काम दिदिलियां मे ठीक चलता नही दिखाई पड़ा क्योकि अब कुटीर-उद्योग की तरह जूते बनानेवालो की भी प्रतिद्वद्विता जूते के कारखानो से थी । अब दूसरे देशो के सहकर्मियो की तरह बिसारियोन ने भी पराजय स्वीकार करते हुए गाँव छोड़कर पहिले गोरी फिर तिफलिस की अदिल-खानोफ फैक्टरी मे जाकर काम किया । एशिया की एक इतनी उत्पीडित श्रेणी में पैदा हुए बालक के लिए कोई ज्योतिषी भी कब ऐसे पद की जिस पर इस बालक को पहुेँचना था भविष्यवाणी कर सकता था ? एक एशियाई चमार का लड़का दुनिया का अद्वितीय नेता और अमर प्रज्यनीय शिक्षक होगा इसकी आशा एकातेरिना और बिसारियोन भी कब कर सकते थे ? बिसारियोन जार्जिया की तत्कालीन राजधानी तिफ़लिस की बूट-फेक्टरी मे काम करता था । गोरी कस्बे के उपनगर मे वही छोटा-सा पैतृक घर था जिसके बारे मे स्तालिन के सहपाठशालीय द. गोगोखिया ने अपने सस्मरण में लिखा है जिस घर में परिवार रहता था वह पाँच वर्ग गज से ज्यादा बड़ा नहीं था। घर के साथ रसोई की कोठरी भी थी । दरवाजे से सीधे ऑगन मे पहुँचते थे वहाँ कोई दहलीज नही थी। फर्श ईटो का था। एक छोटा-सा झरोखा था जिससे छनकर रोशनी आती थी। घर मे सारा फर्नीचर यह था एक छोटी-सी मेज एक स्टूल एक लम्बा सोफा जो पुआल भरकर मामूली कपडे से ढाँककर बनाया गया था । बिसारियोन जुगशविली के काम के हथियार थे-एक पुराना संडा-सा गोढा हथौडा और चमडा सीने की सुई जो सग्रहालय मे आज भी मौजूद है । इसी घर मे 18 दिसम्बर 1879 को बिसारियोन और एकातेरिना 16 / राहुल-वाइमय-2.4 जीवनी और सस्मरण




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