महाभोज | Mahabhoz

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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महाभोज 7 सुत्रधार आज तो सरीहा में पत्ते का हिलना भी एक घटना की अहमियत रखता है। महीने-भर बाद ही तो चुनाव है । यों तो चुनाव विधान-सभा की एक सीट-भर का है फिर भी है वहुत महत्व- पूर्ण क्योंकि इस सीट के लिए भूतपूर्व मुख्यमंत्री सुकुल बाबू खुद खड़े हो रहे हैं यानी कि पिछले चुनाव मे हारी हुई पूरी- की-पूरी पार्टी खड़ी हो रही है--खम ठोककर ललका रती हुई सत्तारूढ़ पार्टी के पूरे अस्तित्व को चुनौती देती हुई । सीट केवल एक पर पुरे मंत्रिमंडल के लिए जेसे एक चुनौती । यही कारण है कि आज सरोहा मे घटी छोटी-से-छोटी घटना भी इसी सीट के साथ जोड़कर देखी-परखी जा रही है । वरना और दिन होता तो कया तो बिसु और क्या बिसु की मौत अन्तिम वाक्य के साथ ही मंघ पर धोरे-धीरे अन्घकार ।




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