प्राकृत साहित्य का इतिहास | Prakrat Sahitya Ka Itihas

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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विषय-सूचीपहला अध्याय भाषाओं का वर्गीकरण. दे-डेर भारतीय आयमभापायें ० ।मध्ययुगीन भारतीय '्ार्यभाषायं.. ४ ,प्राकृत और सस्कृत प्र आकृत और अपगेश द प्राकृत भापायें १०-१९ प्राकृत श्वौर महाराष्ट्र १२प्राकृत भापाओ के प्रकार १४-३२पालि और श्रशोक की घमलिपिया १४ .भारतेतर कृत १५४ इघसा गधी १६ शौरसेनी ० महाराष्ट्री ्ढ ये #पशार्ची २७ य मागघी २९दूसरा अध्यायजैन आगम-साहित्य ( ईसवी सन के पूतव शवी शताब्दी से ईसबी सन की ५४वीं शताब्दीतक ) ३३-१४९ जेंन श्ागम द्द तीन चाचनाये ३६ यम की भाषा श् श्ागमों का महत्त्व १, आगमों का काल हि द्वादशांग छ४-१०४ श्रायारग दर' सूयगडग ध््व' ठाणाग भ्र्पू' समवाथाग द्क. वियाइपण्णत्ति न! नायाधम्मकहाश्यो ७८। उचासगदसाओं ८५। व्मन्तगडदसाओं ८ व्णुलरोवचाइयदसाश्रों थ्०! पण्हवागरणाइं २, विवागसुय दर' दिटठिवाय थ्&' द्वादश उपांग ए८प्नरर उचवाइय १०६४! रायपसेणइय १०७। जीवाजीवामिगम १११। चन्नवणा १५२। सूस्यिपन्नत्ति ११४ं जम्बुद्दीवपन्नत्ति ११४। चन्दपन्नत्ति ११७। निरयावलिया अथवा कप्पिया ११८ कप्पवडसिया १३११ पुश्फिया १२१ पुष्फचूला १२९ चृण्टिद्सा १९९




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