मैत्रायणी संहिता | Maitrayani Samhita
श्रेणी : साहित्य / Literature

[adinserter block="2"]
Add Infomation AboutDr. VedKumari Vidyalankar
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
11.96 MB
कुल पष्ठ :
363
श्रेणी :
यदि इस पुस्तक की जानकारी में कोई त्रुटि है या फिर आपको इस पुस्तक से सम्बंधित कोई भी सुझाव अथवा शिकायत है तो उसे यहाँ दर्ज कर सकते हैं
लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
No Information available about डॉ वेद कुमारी विद्यालंकार - Dr. VedKumari Vidyalankar
पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)श्प,१०.उक्थयग्रह, घवग्द्द, ऋतुग्रह, ऐन्द्रानग्रह, बेएवदेव,ग्रह,माध्यंदिन सवन (१५४३)०णुक्-मन्थी, आग्रायण और उक्थूयग्रहों का पुन-
ग्रहण, मरुत्वतीयग्रह, सवनीय पुरोडाश-यजन,
मरुत्वती यग्रह-होग, माहेन्द्रेग्र ह,तुतीय-सवन (१४४)-णआदित्यप्रह, आप्रायण-उवबधूय का पुनर्प्रहण,
सवनीय-यजन, साधचिभिग्रह, चैएवदेवग्रह, सीौम्य
चरु, पात्नीवतग्रह, हारियोजन, ग्रह, अति-
ग्राहयग्रह, पोडशीग्रह, दघिग्रह, आदाभ्य, और
अंशुग्रह, पश्वे-कादशिनी, द क्षिणा-होम, समिष्ट
यजुहोम, अवभूथ, काम्य पणुयाग, उदवसा-
नीयेप्टि,(४) अ्निप्टोम के अवान्तर भेद (१४६)
उव्थूय, अतिराघ्र और पोडणी, सोमयार्गों
के अन्य भेद,वाजपेययाग १५१०काल, देखता-हुवि, यजन-घिधि, प्रात: सवनमाध्यं-दिन-सवन, रथधारोहुण, रथ दौड़, सपारोहण, अन्नहोम, अभिषेक, ग्रहहोम, पशुयाग,
तुतीय-सवन,राजसुययाग १४५५-काल, देवता-हवि,() यजन-विधि, (१६१)--
नेक्रत-आनुमत इप्टि, पाँच विशिष्ट हुवि-
यगि; . आप्रायणोध्टि, . चातुर्मास्ययाग,
इन्द्रतुरीयाग, भपामार्गहोम, पंचेध्यीय होम,
देविकाहवियागि, त्रिपंयुक्त हविर्यागि, रद्नियों
की हवियां, विशिष्ट हृवियगि,(व) दीक्षणीयेण्टि (१६५)--
मेत्रावाईस्पत्य चरु, देवसुव हृथियां,
User Reviews
No Reviews | Add Yours...