जाति-विज्ञानं का आधार | Jati-vigyan Ka Aadhar

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Jati-vigyan Ka Aadhar by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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जाति की बनावट का आधार श्८्प्‌ अब फिर द्विसंकर की ओर ध्यान दें तो इसकी क्रिया मेण्डल के मटरसम्वन्धी सम्परीक्षण में, जिसका वर्णन अभी किया गया है, वंशानुगति के निम्नलिखित विस्तृत चित्रण में भली-भाँति देखी जा सकती है। हम मान लें कि १४४ पीले के पित्रयक तथा 00-> हरे के पित्रयक हैं और पार >> गोल के पित्रयक तथा ११४४४ न सिकुड़े के पित्रयक हैँ । पीले गोल (नल श्४्ठ पार) तथा हरे सिकुड़े (नए 1४१४) घारम्भ के माता-पिता हैं। इनमें संकरण करने पर प्रथम पीढ़ी में सब बाह्य समरूप (71८०5 0) पीले गोल मटर निकलते हैं, जिससे यदि हमें ठीक पता नहीं होता तो हम परिणाम निकालते कि इसकी ४४ पार बनावट हैं। पर वास्तव में उनका समपिच््यक (जीनोटाइप) अथवा भिन्नरूप (आइडिओटाइप), जैसा कि हम जानते हैं, १७ 1९९ हें क्योंकि उनकी क्रिया से स्पष्ट हैं कि पीले तथा गोल प्रभावी तथा हरे सिकुड़े अपसारी हैं। दूसरी पीढ़ी में अनेक प्रकारों की उत्पत्ति होगी । इनमें से एक पीले तथा गोल समरूप होंगे तथा चार समपिच्यक होंगे--जो ये हें, ४४ पर, श४ +ार, श0 उरार तथा ४0 1९९४ । परन्तु पीले तथा गोल के प्रभावी होने के कारण ये गुण बाह्य समरूप के साथ भी दीखते हैं । उसी पीढ़ी में एक दूसरे वाह्य समरूप की उत्पत्ति होगी जो पीले तथा सिकुड़े होंगे। समपित्यक में यह ५४ १५४१४ तथा ४७ १४११ से प्रदर्शित होंगे। यह देखा जायगा कि सिकुड़ेपन की दृष्टि से मटर का यह प्रकार युग्मेक- गुणी (होमोजाइगस, समयुग्मिक) है, परन्तु रंग की दृष्टि से केवल एक भाग ऐसा हैं, क्योंकि हरे रंग के लिए आधे में अपसारी पित्रयक मिलते हें। इसी पीढ़ी के तीसरे प्रकार में हरे तथा गोल समरूप होते हैं, परन्तु फिर वास्तव में वे 0८0 हार तथा 00 ९५४ समपित्यक में मिलते हैं। यहाँ पर रंग का पिच््यक युग्मेक- गुणी हूं तथा आधे में गोलपन युग्मानेकगुण (विषमयुग्मीय) हैं। अन्त में चौथे प्रकार की उतपत्ति में वह गोल और सिकुड़े होंगे तथा समपिच््यक में वह भी 00 १५1९ याने युग्मैकगुणी होगा । यह हरे तथा सिवुड़े हुए अपसारी पिन्र्यकों से वनता है, अतः जब तक वह अपने समान का ठीक प्रसव न कर सकें इसकी उत्पत्ति नहीं हो सकती । इन प्रकारों की उत्पत्ति का वास्तविक अनुपात इस प्रकार होगा-- वाद्य समरूप में कट पीले, योल होंगे (परन्तु दो ही युग्मैकयुणी होंगे ) , लेट पीले तथा सिकुड़े होंगे (परन्तु केवल <ोट युग्मैकगुणी होंगे ) , टूसरे सै वाह समरूप में गोल तथा हरे होंगे (परन्तु केवल दे फिर एक वार युग्मैकगुणी होंगे) तथा अन्त में टू वाह्म समरूप तथा सम पिच्यक में हरे तथा सितुड़े होंगे । टड ६




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