यात्रादर्पण | Yatradarpan

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Yatradarpan by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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संयुक्त मदेश । पट दिगम्वर जैनी भाइयंकि यहां ८५ ग्रह हैं बौर वावा शिवचरणछाल यहां प्रसिद्ध साहकार है । यहां ४ दिखरबन्द मन्दिर तथा ५ चैत्यालय तथा १ धमेशाला भी है। रलफरेड पाक जो सच १४७० में डियूक आफ ऐडिनबरोंके हिन्दुस्थान आनेकी यादगारीमें बनाई गई थी बढुत खूबसूरत है। मकफर्सनपाकं छावनीमें मोर रेठवे स्टेशनके पास ख़ुशराबाग जिसमें तीन मकृबरे हैं देखनेके लायक हैं इलाहावाद्मे कई उम्दा दोटल और सराय हैं स्टेशन पर भी आराम कमरे दें सवारी इरवक्त मिछती हैं। स्टेशनके बाहर ही ठछाठा बिहारीलाल ऊँंजलालकी धम- शाला है जद्दां सब चीज मिल सकती है । इस दाहरकी सन्‌ १८५७ इं० के गदरमें एक देसी परटन बिगड़ गई थी इसलिये इसके नामपर चगावतका नहा है । षटा । नोजूड यह इसी नामके जिठेका मुख्य शहर 3. 3. & 0. 1. तथा ४. 1. 2. लाइनके रेलवे स्टेशन कासगंजसे १४ कोस दूरी पर है यहां ५७६ दिगम्घर जेनियें।की बस्ती तथा १०० गृह हैं। यहां १ शिखरवन्द मन्दिर ? चैत्यालय है प्रजन प्रश्नाल योग्यतासे दोता है । कन्नौज । यह कसवा फरुख़ाबाद जिलेमें है। यदांकी बस्ती बहुत पुरानी है इसके सतयुगम पडवार चेतामें कुशस्यली और द्वापारमें गाद्यपुरी और कलयुगमें कलौज नाम होनेका कारण यह है कि यहां अगले समय वड़े २ नामी राजा होगये । इस शहरका नाम एक राजाकी कन्या कुबजी होनेके कारण कोई उसके साथ विवाद नहीं करता था । लाचार दोकर एक बाहाणके साथ दिवाइ कर दिया गया इसलिये उसकी यादगारीमं कान्पकुव्ज कहलाने ठगा अब वोलचाठमें कन्नौज कहलाता है । यहां दिगम्बर जैनियांकी मायः २०० की वस्ती है दो शिखरवन्द्‌ मन्दिर तथा 3० घर्मेशाख हैं यहांका किठा राठौर राजाओंका काठी नदीके किनारे देरसा बडा है इसम पहले तीस हजार तम्बोलियाकी दूकानें थी आावादीसे झुछ दुरपर दो मकान वाराद्रीके नामसे वने हू जिनकों ठोग आला उदनिकी कचहरी बताते हैं। यहां गई मिठाईके तथा इच देशी कागल़ और देशी छीटें अच्छी बनती हैं । इत्र और तेल यहांका मसिद्ध है ।




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