जोश | Josh

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Josh Mleehabadi Aur Unki Shayari by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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जोग १४ मंजिल बना सके# । उसने हर प्रकार के नेतिक सिद्धास्त अह्िसा शरीर समानता को श्रस्वीकार किया । ईइवर की सत्ता से इन्कार किया । संसार में सब से वड़ा महत्व में (श्रहंभाव) को दिया श्रौर स्त्री को पुरुप की सेवा झ्नौर मनोविनोद का एक साधन सिद्ध किया । प्रत्यक्ष है कि जोग की दिद्रोह्टी प्रझ्नति को इस प्रकार के सिद्धान्तो से कितना सीधा सम्बन्ध हो सकता था । उन्होंने नतथे के हर विचार को श्रपनी नीति श्रौर नारा वना लिया श्रीर भ्रपनी हर रचना पर विस्मिल्लाह ( खुदा के नाम से शुरू करता हूँ ) के स्थान पर शव नामे- कुव्वतो-हयात ( शक्ति तथा जोवन के नाम ) लिखना शुरू कर दिया ॥ उमर खय्याम हाफिज श्रौर नतकषे से प्रभावित होने के ब्रतिरिक्त देश की राजनेतिक परिस्थितियों ने भी उन पर सीघा प्रभाव डाला श्रौर उनकी विद्रोही प्रवृत्ति को वडी शक्ति मिली | श्रतएव जब उन्होंने श्रलग्रमान--प्रलहजूर मेरी कड़क मेरा जलाल । सुन सफ्काकी गरज तूफान बरवादी कताल ॥ वरदछ्ियां भाले कमानें तीर तलवारें कटार । वरकी परचम झ्रलम/ घोड़े पयादे घहसवार ॥ रू दक्ति प्राप्त करो शरीर प्रत्येक नें तिक सिद्धान्त को द्रुरा दो वाह इसके सिए तुम्हे कितने ही वलहीन ध्यक्तियों वो कुचलना पढ़े (नतपे) १. पुदा की पनाह २८ तेल. 5. हिसात्मक ४. प्ुद्ध ४. दिल्‍ली की-सी ददित ( सजी ) रखने वाले. ६.-७. पठाका




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