वयं रक्षाम | Vayam Raksham Purvardh

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Vayam Raksham Purvardh by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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हूँ कं में रंग दिया है। फिर भी यह इतिहास-रस का उपन्यास नहीं “श्रतीत-रस' का उप्यास है । इतिहास-रस का तो इसमें केवल रंग है, स्वाद है श्रतीत-रस का । श्रब श्राप सारिए या छोड़िए, श्वापको श्रख्तियार है 1 एक वात श्रौर, यह मेरा एक सौ तेईसवां ग्रन्थ है । कौन जाने, यह मेरी अंतिम कलम हो ।. में यह घोषित करना श्ावश्यक समकता हूँ कि मेरी कलम श्रौर सें खुद भी काफी घिस चुके हैं । प्यारे पाठक और लगुदृदस्त सित्र यह न भ्रूल जाय॑ं | दिल्‍ली-शहादुरा २६ जनवरी १४१३ श्ञानघाम-प्रतिष्दान | -पेतुरसीम




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