जार फोर्टी ईयर्स प्रैक्टिस | Jahrs Forty Years Practice

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Add Infomation AboutGeorg Heinrich Gottlieb Jahr
लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
16.23 MB
कुल पष्ठ :
464
श्रेणी :
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लेखक के बारे में अधिक जानकारी :
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)लक्षण-दूची श्७ अध्याय लक्षण परष्ठांक सिक विश्वस्ला । रे. घार्मिक उन्माद । ४. आत्महत्या करने का उन्माद ।. ४. कामोचेजक उन्माद। ६. घर जाने की उतावली । ख--उन्माद भर एक ही विषय का चिन्तन १. क्लोघ का उन्माद । २. निरन्तर एक ही विषय का चिन्तन का उन्माद । दे. लियों और पुरुषों का कामोन्माद | ४० कुम्प-प्रलाप | ग--वुद्धि-श्रम के नेक रूप १ एक दी विपय का निरन्तर चिन्तन । २-८ ऐसी कल्पना मानो अपने चारों ओर मुर्दे और ककाल हैं । ३. चोरों के मय की कल्पना । ४ मृगी से सस्तिष्क-विकार । ४५. विभिन्न प्रकार के अव्यवस्थित लक्षण । घ-कुछ वाहुरी काणों का निर्देश मुख ओर जीम के रोग ११७ १-मुख-गद्भर में होने घाले विकार १. मुखक्षत छोटे-छोटे घाव । र- पेट में दद । ३. मुख से वद्घू निकलना । - विशेष निर्देशन के सम्बन्ध में । २--लार गिरना दे--जीभ के रोग १. जीम की सूजन तथा उसके साधारण प्रदाह और स्फीति । २. घाव तथा कढ़ी गाँठें। ३. जीभ के नीचे की गिल्टी । ४. जिद्ना के दद | न
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