सहज-योगाभ्यास अर्थात गृहस्थकी योगशिक्षा | Sahaj-Yogabhyaas Or Grihastha Ki Yogashiksha

Sahaj-Yogabhyaas Or Grihastha Ki Yogashiksha by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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.[छ है यूराए इपनिपद्र, रफूति झादि सबझी री व्यवस्था है, कि-माया मे के पार जानेंफे लिये येगसाधना करनी होगी । ' एक श्रणीके साग फहते हैं, कि-पढ़ हा हम जानते हैं । परन्तु £ के एससाय संग्रारफा उाइफर खी पुरुप दूढ़ें पाता पिता छोदि परि- ! | घारको मागपें बैटाल चनमें लाफर येागी सन जाना धर्म है ।' चनमें जाना अघपे नहीं है, परन्तु हटसे येही घर द्वारके छोड़ | है लाना इरवश्य ही यम है ! तुप हुप बनमें न जाकर सी पुत्र | | गाता पिनां झादिके लिए ही बैठे रे तो कया कर सकते हैं ? | 8 मृत्पुकें जरा जरा 'पंपुत्नी दिनाते ही सदाके लिये चलेनाने हैं। | खी घूम थादि भी हपका छोड़रुर चले जा सकते हैं । यहाँ कौन ही किप्तरा है? इरएक शर्वदास पर, हुदपक्ी इरएफ घढकन एप, अपनी दरएफ इचतमें हंप थिवारते, हैं, कि हम स्टाघोन हैं, परन्तु ( ) खिल हक का कि का हु काट, था डक बा प्रक्नतिफे मोल लिये हुए दाप हैं-इम शरीर, मन, सफज चिन्तायें 2 भर सफज्ञ भावेमिं मकतिके क्रीचदास हैं, ते। भी इप संसारके | कर्ता धरा वनकर, सर के त्यागफर संतारका छोड़नेमें धर्म | 4 समसभतें दें, यद्दी तो पाया ऐ ! मायाफी फॉँसीफा कॉटना कया | 8 सदन हैं । की सा फिर उपाय कया हैं? संतारका छोड नहीं सकते तो फिर | काम केवे होगा १ संप्रारका ते। छोड ही नदीं सकते । स्त्री है पुत्र 'ादिके दीचऐं रद फर कचेव्यसा पाठहान करनेसे ही काम | । चनेगा । इस शुभ संपेगक लिये इपारे शुसतन श्षि साघन- 2 ४ त्वके स्पर्गीय द्वारका खोजगये हैं । चनफी झूपोसे अभी .तकफ | चह तरर-दद सार-रत्न हिन्दुओं के घरों में-दिन्दुओं के हृदयों में- | | दिन्दुझोंदे साथ तासाफन्पमें विद्यमान हैं। इम इस पुस्तकर्मे, यद- है | स्वोंके लिये बन दी सच उपायोंका चतानेका यटन करेंगे । अन कष्या झा उननएा से उस उन रे क खाज रा ऊउ पद रा उन उन्य फसल ऊत्स कष्यहर,




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