वृत्ति प्रभाकर | Vritti Prabhakar

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Vritti Prabhakar by निश्चलदास - Nishchhal Das

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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अनुक्मणिका 1 नल पृू्ठांक. अर्संगांक, विषय, २५ ४. उक्त दोचूं पक्षनकी िठक्षणता २५५ मतमदर्सैं संबंध विलक्षणताके कथनकी ससंगतता, सम २१५६ '्यार्चितनके कधनपूर्वकउक्त सथकी सिद्धि. ...... . ३५९९ जाग्रतमैं होनेवाली बत्तिके अनु- बाद. पूर्वक स्वप्नावस्थाका लक्षण .... का १५८ सुष्बति .. अवस्थाका लक्षण. १५९, सुषुत्तिसंत्न्धी अर्थका कथन १६० उक्त अवस्थामिदकूं बत्तिकी अधघीनता. अमर १६१ धत्तिके प्रयोजनका... कथन, २१६९ कल्पितकी निष्त्तिथिषें विचार .. कल्पितकी निदत्तिकूँ अधिष्ठाच- रूपताएरबैकमोक्षमें देतापत्तिदोषके कथनकी अयुक्तता, -..- १६३ न्यायमकरंदकारोक्त अधिष्टान० रूप कल्पितकी निदत्तिपंक्षमें १ ६४ न्यायमकरंदकारकी रीतिसें अ-. विछानसैं सिननकटिपतकी लिद .*.. तिका निरूपण. ...«... »««» श्ददे श्र न्स्ग्न् छिपे है प्रसंगांक, विषय, १ ६९ न्यासमकरंदकारकी रीतियँँ क- द्पितनिवत्तिके स्वरूपनिर्णयवा- स्ते अनेकविकट्पनका ठेख, १ ६६ न्यायमकरंदकारकी रीतिसैं उक्त च्यारिप्रकारसैं - विल्क्षण सौ न्ह्मसैं मिनपंचमप्रकाररूपकल्पि- तकी निवात्तिका स्वरूप १ हू ७ न्यायमकरंदकारके मतकी अस- सीचीनता. नि कक श्द३६ १ द््ट न्यायमकरंदकारोक्त ज्ञात अधि- शक ड़ ४ ९७ श््द्ट छानरूपकरिपतकी निवृत्तिपक्षमें दोषका उद्घार भी प्रलंगमें विदो- षणउपाधि भीोर उपकक्षणका छध्तण, १ ६९. मधिानरूपनिवृत्तिके पक्षमें पं- न्वमप्रकारवादीकी दाका- १७० उत्तझंकाका समाघान, - «८८ १७१ न्यायमवारंदरते अन्यरीतिसें अधि- छानतैं मिन कल्पितकी सिदति- का स्वरूप १७९ उत्तमत्तमें पुरुषार्थका स्वरूप ०७ ७७. किन (१५ ) पूछांक,. 8९, ध्६४० ४४१ ४४९ + 88 | ( छुम्खभाव वा _ केवल सुख ) ४४५ इति बृत्तिप्रभाकरविषयाजुकमंणिका समाझा ॥ कण या




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