हिन्दी भगद्गीता | Hindi Bhagawadgeeta

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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गीताका परिचय । डकल भला चला कं पा रथ 0यीताश्रयेडहंतिष्ठामि, . गीतामेचोत्तमंत्रहम । गतिज्ञानसुपाशरित्य, भीछोकान्पालयाम्यहस ॥मैं गोताके भ्राथय परदो रहता हाँ, गोतादो मेरा परमोत्तम घर है और में गोताके ज्ञानका आथय लेकरद्ी त्रिलोवोका भरगपोषण करता हूँ ।और भी कहा है-- विदानन्देनकृष्णेन ,पक्ता स्वमुखतोउजुनिमू । बेदश्रयपरानन्दा, .. तततरार्थज्ञानसंयुत्ता ॥यह गोता खबं परब्रह्नृरूप चिदानन्द योक्ष्णने अपने मुखसे अजजुनको सुनाई है; इससे यह वेदत्रयी-रुप, कर्मकाणडसय और सदा भानन्द तथा तत्वज्ञान की देनेवालो है ।न्िचारनेको बात है कि, जिस गौोताके वक्ता सय॑ पूर्णत्रह्म योकष्ण हैं; ययोता भ्र्जुन-सरोखे मद्ाधुरन्थर तेजस्वी और जितेन्द्र य पुरुष हैं श्ौर कर्त्ता छप्णुददेपायन ब्शास जेसे महात्मा हैं, भला उसके भवधो, त्रयतापनाशिनो और तत्त्ताथज्ञानदायिनी चोनेमें क्या संशय है ?इसमें तो कोई सन्द हह्ो नहीं है, कि गोतासे बढ़कर ज्ञानका कोई दूसरा ग्रत्थ नहीं है । इसको समभकर पढ़नेंसे मनुष्य ज्ञान सिद्दि प्राप्त करता है, और भअन्तमें जन्म-मरणसे छुटकारा पाकर ब्नह्मरूप हो जाता है। जो मनुथ-देह् पाकर इस गोतारूपी अस्तको नहीं पोता, वह अस्त छोड़कर विष पौता है; अत- एव जिन्हें जन्म-मरणके कट्टसे छुटकारा पाना हो, जिन्हें संसार- सागरसे तरना हो, वे सौताकों समक कर पढ़ें-पढ़ावें, सुमे' और सुनावें । कगोताका विषय कठिन है । इसमें ज्ञानकौ बातें हैं । ज्ञानकी बातें बिना ससभी, बिना बुद्धि लड़ाये, माथे में नहीं घुसतीं । जो. बात




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