सर्दी,जुकाम और खासी | Sardi,Jukham-khasi

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Sardi-jukham-khsi  by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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मर्दी का कारण जिस किमी भी वस्तु से इलेष्मिक कला में जलन उत्पन्न होत। हैं श्रयवा जो भी वस्तु दर्लप्मिक कला को कमजोर करती हैं, वह श्रत में सर्दी लगने का कारण होनी हैं । जो लोग अपने रहन-सहन के प्रति वदुत लापरवाह रहतें हैं उन्हे श्रपनी गलतियों का फल भोगना ही पडता हैं । दारीर की रोग-प्रतिफारक थक्ति के क्षीण होने में सप्ताह, महीने श्रौर कमौन्कभी सालों सा जाने है, इसके वाद ही कप्टकारक रोग दारीर में घर चना पाते है, गलत रहन-सहन ्रागें या पीछे धरीर के लिए श्रनर्थ- कारी मिद्ध होता ही है 1 दो श्रारमी करीव-करोब एक ही तरह की गलतिया करते हूं, पर ययो एक को एक रोग होता हैं श्ौर दूसरे को दूसरा, इसका कारण हम नहीं बता पा रहे हैं। पर सभी के दारीर में कुछ ऐसे स्थान होते हू जहा रोगो की जड़ जम पाती हैं, अयवा कुछ कमजोर जगहें होती है गौर जब मनृप्य स्वाभाविक जीवन से श्रहुत दूर चला जाता हैं तब रोग उसके थारीर में इन्हीं स्थानों पर प्रगट होते हूं । यदि वह कमजोर स्थान ब्लैप्मिक कला हुई तो दरीर की झस्वाभाविक श्रवस्था साधारण सर्दी श्रौर जुकाम के रुप में प्रकट होती हैं । सर्दी होने के श्रनेक कारण हैं । उनमें सबसे वडा कारण हैं गलत' भोजन । चर्पा से हमें यह बताया जा रहा हूँ कि सर्दी कुछ विजयेष कीटा- णुन्नो के कारण लगती है। यदि सचमुच इन कीटाणुश्नो के कारण सर्दी




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