गृहस्थाश्रम | Grihasthasram

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grasthasram  by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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+ गहस्थाश्रम में सुख के साधन + शिं हक वेद दि द्न. टन कु टी डर कम हे कक हब क् थक सर्वेप्ाजा पत्था' प्राणानात्म सावेधात | क्र तान्पवान ब्रद्मरक्षात ब्रह्मचारण्या, ब्रतमु पी ह दर प्र जगत पिंता परमात्मा की प्रजा श्रंलग २ झंपने 'ांतो में माणों को फ धारण करती हैं; परन्हू उन माणों की रक्ता द्रूह्मुचर्यू नर द्वारा ही होती. है।' : धर्या, कान हट बुर है सं० ह५। दे मे नेनें स्ॉसि नपिशंचा। सहन्ते देवानमोजः प्रथम जल रै वत्‌ | योविभि दाश्षायएं हिररय सजीवेषु कण दीघेमायु+ | भि न्यस्य ापनलगपयनवकमयप कु जो पुरुष प्रथम श्रवस्था में प्रह्मचय्य पालन करते हुए गुणी माता, पिता, आचाय्ये, से शिक्षों माप्त करते हैं, वही उत्साही जन दीघायू हो- !* कर हु नलमलटटसररटटटटरनटरयात कद, र सब विष्नों ओर हुष्टों के फन्दों से वच विज्ञान एवं खुवण श्रादि ह धन को माप कर संसार में यश पाते हैं। -... प्‌ जौ रथ का० ? स० २४ मं० २. मी दि िक पी हा द् “की व्यरदसकर सा पियकपकककफेफफफर्रेपिफिफयपकफलसककोफकर 3९




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