हमें क्या खाना चाहिये | Hamain Kaya Khana Chahiye

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Hamain Kaya Khana Chahiye by झवेरभाई पटेल - Jhaverbhai Patel
लेखक :
पुस्तक का साइज़ : 6.13 MB
कुल पृष्ठ : 154
श्रेणी :
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झवेरभाई पटेल - Jhaverbhai Patel

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पन्द] .युक्ताहार या. योग्य॑ आदारका यहीं गर्ष है | दारीरकी वनावटमें जिन चींजाकी आवश्यकता होती हैं उन्हें ही नींव समझकर आहार-शास्त्री छोग युक्ताह्दारकी योजना बनाते हैं | वाद उसमें उम्र भावोहवा मिह- नतकें प्रकार झादिके साथ मेल विठा छेना ही वाकी रह जाता हैं _ झारीर जिस तरह इन द्व्योंका बना हुआ होता हैं उसी तर भिन्न मिन अन्न तथा दूध आदि खुराककी चीजोंमिं भी ये द्रव्य विशिष्ट ग्रमाणं दी रहते हिं | अन्न भी एक किस्मका शरीर ही है । अनके पर्ण मागका उपयोग करनेमें युक्ताहारकी दिशामें दी प्रयाण होता है । उसपर विभिनन प्रक्रियाएं करके उसके कव बंका ही उपयोग कानेंसे युक्तादारका लोप होता है । कि उपरोक्त द्रच्योंमेंसे प्राणवायु जख्वाय॒ ( दायड़ोजन 3 नत्रवायु ये तीनों बहुत ही थोड़े प्रमाण खुले आम दारीरमं पायें जाते हैं ) सच तो यह है कि ये . तथा बन्य सभी द्रव्य भाँति भौतिके रासायनिक मिश्रणोकि रूपमें दरीरें रहते हैं । मांस नत्रवायुकी प्रधानता होती है तो ढुडडीमें तथा दौँतिमें देर्लशियम और फॉस्फ्रसकी । शरीरके अंदरका छोड विशेषरूपसे रकतमें लेकिन शक्कर और स्निग्ध द्रव्य सबत्र ही फैल रहते हैं । इस प्रकार झारीरके सभी दिस्सेमिं थोड़े बहुत प्रभाणम सभी द्रन्य पाये जाति हैं । - परिशिष्टम दिये गये कॉप्टकॉसे तथा निम्न दिये गये सूर्ोकी सद्दायतासे डरीरकी बनावटके उपयुक्त युक्तादारकी कल्पना आ सकती है। शक्कर द्रव्य स्निघ द्रव्य तथा नत्रजके बनावटका विवरण सूत्रखूपम आगे दिया जांता है । . यहां निम्न प्रकार शब्दोंकि संक्षेप काम ढाये गये हैं ।-- (कार्बन क प्राणवायु न प्र जखवायु न ज नत्रवायु सन ) (२१) शक्कर द्रव्य शक्कर द्व्यका सादासा नमूना है. मघुशर्करा ((15005621 मघुडानराव्सी बनावट का दा ज श२ प्र ट्ु हु यान. मधुदाकयक काबत




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