प्रमुख कहानियाँ | Pramukh-kahaniyan

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Pramukh-kahaniyan by विनय मोहन शर्मा - Vinay Mohan Sharma
लेखक :
पुस्तक का साइज़ : 8.2 MB
कुल पृष्ठ : 310
श्रेणी :
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विनय मोहन शर्मा - Vinay Mohan Sharma

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ड] के सन्निकट दोती जा रही हैं। बहुत सम्भव है कि भविष्य में कहानी जीबन के इतने नजुदीक पहुँच जाय कि जीवन चस्त्र आर कहानी में क्रोइ भेद ही न रह सके। इसी से कहानी के एक चंग रखा-चरित्र के पल्लबित होने की बड़ी सम्भावना हैं। क्योंकि रेखा-चरित्र कल्पना नहीं प्रत्यक्ष जीवन का चित्र होता हैं । हिन्दी-विभाग विनयमोहन शर्मा नागपुर-विश्वविद्यालय तिलक जयन्ती १६४८९




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