विमान - वत्थु | Viman-vatthu

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Viman-vatthu by राहुल सांकृत्यायन - Rahul Sankrityayan
लेखक :
पुस्तक का साइज़ : 1.33 MB
कुल पृष्ठ : 90
श्रेणी :
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राहुल सांकृत्यायन - Rahul Sankrityayan

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१1€ |] पदीपविमानं ७ तमापगा अनुपरियन्ति सब्बदा सीतोदका बालुकसन्थता नदी । अम्बा च साला तिलका च जम्बुयों उद्दालका पाटलियों च फुल्ला ॥८॥। त॑ भूमिभागेहि उपेतरूप॑ विमानसेट्ट भुससोभमान । तस्सेव कम्मस्स अयं॑ विपाको एतादिसं पुल्ञाकता लभन्ति ॥९॥। कटागारा निवेसा मे विभत्ता भागसो मिता। दहल्लमाना आभन्ति समन्ता चतुरो दिसा ।।१०॥। तेन मे तादिसो वण्णो तेन मे इधमिज्सति । उप्पज्जन्ति च मे भोगा ये केचि मनसो पिया ।॥1११॥। तेनम्हि. एवं जल्तिनुभावा वण्णो च मे सब्बदिसा पभासती ति । एतस्स कम्मस्स अयं॑ विपाकों उद्टाय बुद्दधो उदक॑ अपासी ति ।॥१र२॥। नावाविमानं अटुसं ॥८॥। £--पदीपविमानं (१1६) अभिक्कन्तेन वण्णेन या त्व तिट्रसि देवते । ओभासेन्ति दिसा सब्बा ओसधी विय तारका ।॥1१॥। केन ते तादिसो वण्णों केन ते इधमिज्झति । उप्पज्जन्ति च ते भोगा ये केंचि मनसो पिया ॥1२॥। केन त्व॑ विमलोभासा अतिरोचसि देवते । केन ते सब्बगत्तेहि सब्बा ओभासरे दिसा | ३े॥। पुच्छामि त॑ देवि महानुभावे मनुस्सभूता किमकासि पुर्झं । केनासि एवं जलितानुभावा वण्णो च ते सब्बदिसा पभासती ति ।।४॥। सा देवता अत्तमना मोग्गल्लानेन पुच्छिता । पन्‍्हें पूद्ा वियाकासि यस्स कम्मस्सि द॑ फल 11५॥। अहं मनुस्सेसु मनुस्सभूता पुरिमाय जातिया मनुस्सलोकें । तमन्घकारम्हि तिमीसिकायं पदीपकालम्हि अं पदीपं ।॥। ६) यो अन्धकारम्हि तिमीसिकायं पदीपकालम्हि ददाति दीप । उप्पज्जति जोतिरसं विमानं पहुतमल्यं वहुपुण्डरीक॑ ॥ ७11 तेन में तादिसो वण्णों तेन मे इधमिज्झति । उप्पज्जन्ति च मे भोगा ये केंचि मनसो पिया ॥1८॥।




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