डोलमारुरा ढूहा | Dolamarura Duha

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Dolamarura Duha by अज्ञात - Unknown

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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दि जे थर्तो के रदित्व में राजकुमार दोशा आर रूपराशि राजकुमारी मारुदणी की सुंदर कहानी कया स्थान बहुत सना दे। ठस्म प्रचार यहाँ तक दे कि बाजार में पोषी बेजनेबालों के पास मी दोशा मारू की बात झपवा ठोला मांस का स्पाल नाम की छोटौ-दोटी पुस्तकें इम देखते हैं। पद मोहिनी कथा डितने दी शालों को पकने में हुशराने भ्रौर उनके अमशनमर्नी में सेहिय-दुग्लशरिययी सुखनिंदिगा को बुलाने में खादू का सा कार्य करती रही दे । मैं भ्पनी दो कईूँ कि न लाने किठनी रातों में अपनी पूम्य माठभी तथा अपने प्रिव कदनी कदनेगाले जराझण गंगाइस्रा से राज रानी की इस समघुर कहानी की चाब के साथ सुनकर मैंने इसका पीयूप पान किया दे आर इसके कई अंश ठो भ्रमी तक मेरे स्पूतिपटल पर रचित हैं। चारों झौर मार्टो ने इस कदानी को नाना रूप देते मैं झपनी बुद्धि झोर 'बठुणद का खूब उपयोग किया दे झौर इसके कपानकों एवं दरों को चित्रंकित करने में झगर्यित चित्रों ने झपने कोराल व प्रदशन किया दे। इसको गदि सबस्पान के तर्दोंचम आतीस बाम्यों में ठे एक कहा भाग हो कोई असंगति नहीं । इतिदाप्त की कसौरी पर कसे शाने से इसी कति में कुछ मी स्पूनठा नहीं आने की । बास्तबिक इस एवं ठिसि आदि के मेद से इसके अमरत्व और गोरब को कोई बाघा नदीं पहुँच सकती । झगरप दही हँढाइड उभ्य के मूल संत्यापक के साथ इस कशनी का उठना संबंध नहीं । सोदइदेषडी के पुत्र बूलइरावडी अपने पिता की गद्दी पर मि. माप सुद्दी ६ संक्‌ ६३ को” बिराबे थे और उनका स्वरगंबास खोइ स्थान में मि. मार्गशीप सुद्दी ३ स॑. १६६ को हुआ था बच दे ग्वालियर पर झाऊरमश करनेवाले दिए के राजाशों को पराजित कर शोट रो थे। मदामति दाद साइचर ने मार्य से लिस रूप मे इस कदानौ को सुना उसी रूप में लिख दिया । इतने पर मी याद कशनली झपनी उउमता के गारण राजर्यानी साहिस्प मडार में एक नियज्ञा मइत्च रखती दे और इठविध अप कर्यट्शल भर परिभमी १ संपाइकों की सम्मति में दोका भर बूकइराप पक दो स्पक्ति सी कैसा कि दाद थे दिक्षा दै। परंतु, ससी कि शी भोमाजी की सम्मति है. पूकइराण का समब ग्पारइवीं श्तास्दी थ दोकर तेरदवीं बातपथ्दी है तथा दोका गूरूदराप का पू्ंड था और दसवीं शतास्दी के कणसग हुआ दे ।--संपाइक !




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