शैली विज्ञान | Shaili Vigyaan

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Book Image : शैली विज्ञान  - Shaili Vigyaan
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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किका प्राण-तत्त्व है । इस तथ्य का निश्चाँत प्रतिपादन किया है भारतीय झाचार्य वामन ने : “री तिरात्मा काव्यस्य' । यहाँ 'शौली' दाब्द सौन्दर्यया काव्यगुण का वाचक है । ऑ्रॉक्सफ़्ड डिक्शनरी के श्रनुसार शैलीका एक श्रथ॑ “श्राक्षक गुण” भी है श्रौर वही यहाँ श्रभिप्रेत दे।डी क्विन्सी ने इसी दृष्टि से कहा है कि शैली में प्रतिपाद्य विषय से निर-पेक्ष एक विशेष प्रकार का बौद्धिक श्रानन्द देने की क्षमता होती है ।साहित्य एवं साहित्यशास्त्र में शैली के प्राय: ये ही श्रर्थ प्रचलित रहे हैं। कितु पिछते दो दशकों में भाषाविद्‌ आलोचकों ने भाषा- वैज्ञानिक दाब्दावली में दौली की वस्तुपरक परिभाषाएँ प्रस्तुत की हैं : ( १) प्रसिद्ध भाषावैज्ञानिक बन्डि ब्लॉख के श्रनुसार किसी वक्तव्य की दौली उसकी ऐसी भाषिक विशेषतात्रों में निहित रहती है जो उसे समग्र भाषा में प्रयुक्त समान भाषिक रूपों से पृथक्‌ करती है (लिग्बि--स्टिक स्ट्रक्चर ऐंड लिस्विस्टिक एनालिसिस )स्टीफ़ेन उलमान ने ऐसी कुछ-एक परिभाषाश्रों का उल्लेख इसप्रकार किया है” :(२, श्रन्य विद्वानों के मत से शैली विचारित या श्रविचारित चयन--प्रक्रियाद्रों की फलश्रुति होती है । इनकी विचारधारा एक प्रसिद्ध पाठ्य-ग्रथ में उद्धत इस सुत्र के भ्रनुसार चलती है: “एक ही भाषा की दो उक्तियाँ, जिनका वाच्या्थ प्राय: समान होते हुए भी भाषिक संरचनाभिन्न होती है, शौली की दृष्टि से भिन्न मानी जा सकती हैं ।””(३) एक श्रन्य वर्ग संदर्भगत (संदर्भतः सम्बद्ध) प्रतिमान सेविपथन को दौली का सुल श्राधार मानता है : इनमें से कुछ समीक्षकइस प्रकार के विपथन-रूपों का उल्लेख श्रौर श्राख्यान भर कर देना पर्याप्त मानते हैं, जबकि कुछ भ्रन्य समीक्षक उन्हें सांख्यिकीय दब्दावलीमें प्रतुत करने की चेष्टा करते हैं ।”?(४) शायद इनमें सबसे निस्संग परिभाषा वह है जिसके अ्रचुसार१. “स्टाइलिस्टिक्स ऐंड सिमेंटिक्स' ('लिटरेरी स्टाइल -- ए सिम्पोजियम--.सं० सीमूर चैटमैन । रे. सी० एफ़० हॉकेट--'ए कोसें इन माडर्न लिंग्विस्टिक्स' (१९५८) । दे«. एन० ई० एंक्विस्ट--'श्रॉन डिफ़ाइनिंग स्टा इल' ( लिग्विस्टिक्स ऐंड:स्टाइल, १९६६४) ।१० / दोलीविज्ञाननशे व निनननलिक




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