रामायणी कथा | Ramayani Katha

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Ramayani Katha by बाबू भगवानदास हालना - Babu Bhagwandas Halana

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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प्यक (ग ) हिंमोलिय'कें सेमान सारे भारतवर्ष में पूजनीय हो रहें हैं; और व्यास और घाटमी कि केवल उपलब्ष मात्र हैं । ः वर्तुत ब्यास और चाल्मीकि ते किसी का नाम था नहीं! यह तो पक उद्देश्य से नाम रख लिया गया । ये दोनों इतेनें बड़े श्रन्थ हैं और इन दोनों काव्यों का भारतवर्ष में इतनां देशव्यापों 'प्रभाव है' कि इनके मूल रचथि गा कथियों के नाम विलकुछ लापता हो गये हैं और इस तरह ये कथि अपने काव्यों के भोतर छिप गये हैं । हमारे देश में जैसे रामायण भौर महाभारत हैं वैसे ही प्राचीन श्रीस और रोम में 'इलियड' और 'एनिड' नामक ग्रन्थ थे । वे समस्त ग्रीत'और रोम के हृदयपद्म से उत्पन्न हुए और उन्होंने उनके हृदयपद्म में स्थान पाया । कथि हमर और च्जिंछ ने अपने अपने समय में अपने देश के लोगों को अपनी भाषा द्वारा प्राण द [न दिया । जैसे मेलों और उत्सवों में छोग दूर दूर से एकत्र होकर उस देश को जगमगा देते हैं, उलीः प्रकार हेप्रर और चज्जिंठ के वा्यों ने अपने अपने देशों में पक छोर से दूसरी छोर तक फैल कर वहाँ के लोगों को सदा के लिये आनन्द में डुबो दिया है । किसी आधुनिक काव्य में इतनी व्यापकता नहीं देखी जाती । मिल्टम के 'पैराडाइऩ लास्ट” में भाषा का गाम्भोर्य, छन्द का माहात्म्य और रस की गम्भीरता चाहे कितनी भी क्यों न हो तथापि वह देश का धन नहीं है, वह केवल पुस्त- कालयों को शोभा बढ़ानेवाला है । अतपव ऐसे कई एक प्राचीन काव्यों को एक श्रेणी में रख कर उनका एक नाम निदिष्टि करने पर हम उन्हें महा- काव्य छोड़ कर और कया नाम दे सकते हैं । ये प्रावोनकाल




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