भजन - संग्रह भाग ३ | Bhajan Sangrah Bhag 3

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Bhajan Sangrah Bhag 3 by वियोगी हरि - Viyogi Hari

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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(९ ) मजन पृष्ठ-संख्या जाग जाग जो सुमिरन करे (नाम ) ११२ ज्यों त्यों राम नाम ही तारे ) १०८ तेरी गति किनहूँ न जानी दो... ( महिमा ) ११४ नैनों लख लेनी साई ( गुरु-महिमा ) १०३ बाबा काया नगर बसावों ( बेदान्त ) १०४ भया हरि रस पी मतवारा (नाम ) ११० सिलि गावो रे साधो यह बसंत (५ 2) १११ लटक अठकी मनमाहीं ... ( लीला ) ११३ सखी री आज आर्नेद देव बधाई ( गुरू-महिसा ) 1 ०१ सठ तजि नाँव जगत सैँग राचो... ( नाम ) १०९, साधो भौसागरके मार्दि ( चेतावनी ) ११९ साधों मन मायाके संग (+ . रैए० सुमिर-सुमिर नर उतरों पार (1; .) रै१७ हम बालक तुम माय हमारी... ( प्राथना ) 2१५ हमरे औषध नाँव घनीका (नाम ) १०६ हमारे गुरु पूरन दातार ( गुरुममहिमा ) १०० हमारे गुरु बचननकी टेक ( ग्रे रै०र२ हरि हर जप लेनी ( चेतावनी ) १२१ दरि बिनु तेरो ना दितू ्र१२२




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