हिन्दुओ की जायदाद का उत्तराधिकार ( हिन्दुओ का भारतीय कानूनन उत्तराधिकार ) | Hinduon Ka Bharatiya Kaanoon Ottaradhikar
श्रेणी : भारत / India

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
7 MB
कुल पष्ठ :
166
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)साघारण नियम ्थार ्धाटाच्न नाश शारहती है और उस जायदारसे किसी दूसरेका हिस्सा मुददतरक नहीं रदता तो
उस झाखिरी मर्द मालिकके मरनेके थाद उसकी जायदाद जिस छादमी या
श्ोरतको पहुंचती है बह मरे हुये मालिकका उत्तराधिकारी दोता है। यानीसबसे भाज़िरी मालिकके पास जो नायदाद उसके क्ब्ज़ेमें सबसे अखददा रददी
हो सिफ॑ उसीपर वरासतका कासून लागू पड़ेगा ।दफा ३ वरासत दो तरहूसे निश्चितकी जाती हैइस क्ितावके प्रथम प्रकरणमें स्कूलॉका विपय बयान किया गया है।
उसमे दो वड़े स्कूल है । एक सिताझरा स्कूल और दूसरा दायभाग स्कूछ ।
दायभाग स्कूल सिफं बद्दालमें माना जाता है घोर चाक़ी सब जगहोंमें मिता-
करा स्कूलका प्रसुत्व है। इन्हीं स्कूलोंके अनुसार समस्त हिन्दुस्थानमें दो
तरदकी वरासतका होना निश्चित किया गया है-एक सिताक्षरा स्कूलके
झनचुसार योर दूसरा दायभाग स्कूठके अनुसार । इन दोनों क्रायदोंमे फरक़
यद्द है कि मिताशषरा स्कूल खूनके रिस्तेसे चरासत क्रायम करना है और दाय-
भाग स्कूल धार्मिक छृत्यों के, यानी मज़द्दवी रसूमातके सस्वन्धसे इस तरददपर:
दोनों स्कूछोंके सिद्धान्त आपसभमें विरुद दे । इसी सबबसे चरासत दो तरह
से निश्चित की जाती है ।स्वयं उपार्जिन जायदादके लिये पूर्ण रधिर श्र अद्ध रुधिरका खिद्धा-
न्त माना जायगा -'आात्पाराम चनाम पोड्ट 3. 1. हि. 1926 कण 154तरीका चरासत झगर क्रानूनके खिलाफ हो तो कानूनके खिलाफ चरा-
सतका तरीका नहीं माना जा सकता-ददरवक््साहिद चनाम डालवद्दादुर ६7
0 180, 58 1 0. 285, 4. 1 पि. 1926 311. 156. नसिताश्चरा स्कूठके अनुसार चरासत पानेका दक्दार, परिवारकी रिदते-
दारीसे निश्चित किया जायगा, देखो--लल्त्यूमाई यनाम काशीबाई 5 000,
110, 181: है. 2192, 287,दायभाग स्कूलके झनुसार चराखत पानेका हकदार, वह साना गया है
जो मरे हुये आदभीको धार्मिक कृत्य हारा ठाभ पहुंचानेका इयादा झधिकारी
दो, देखो- जितेन्द्रमोदन चनाम गजेन्द्रयोदन 9 छ. 1. 1 377, 394.
दफा ४. मिताक्षर'छॉके अजुमार जायदाद केसे पहुंचती है
सिताझषरालों के अनुसार जब फ़िलीको जायदाद सिलती है तो चद्द दो
सूरतोंमे से कोई पक दोती है । सिताक्षराकों से जायदाद दो सरतोंसे पहुं-
चना मानपु गया है--पएक तो 'सक्सेदान' और दूखरा 'सरदाइवरशिप' । 'खक्-
सेशन' का भथे है सिलखिला, जानशीनी, अन्लुक्नम, परंपरा, आजुपूवे, उत्तरा-
चघिकारिता, दायभायु । और 'सरवाइवरशिप' का झथे है कि - हिन्दू परिवार,
डे कर दे
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