नयी तालीम | Nai Talim

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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उपनिपंद दाब्द सकत में स्व्ोलिंगी है. जैसे परिपद । उपनिपद क्यों है * गाय हूं। सारी उपनिपद थायें है। अपना सर्वोत्तम ग्रन्थ हिन्दुस्तान का कौन-सा हे * उपनिपद | उपनिपद में से, उस गाय से दोहन कर लिया भगवान ढृप्ण ने और-- दुग्ध गीतामृत महत्‌ भीतारुपी सुदर दूध हमें भगव न कृष्ण ने पिलाया । यायें कौनसी थी * उपनिषद । उन गायों स इप्ण ने हमें यह उत्तम गीतामृतम्‌ पिया । नया हम कहीं देखत नहीं । दुनिया के दूसर देवों की भाषा में बंप बहेंग ? झाराबे शोक पीता जा ।' तुमको पीना है. तो शराव पिन्रो। रब की वात करेंगे गोदुग्ध की वात नहीं दरेंगे । भारत थी सस्कृति हैं, घराव नहीं पियेंगे गाय रा दूध पियेंगें । खादी साय के साय जुड़ जाये गाधीजी की जो प्राथना चलती थी सुबह की वह हम यहाँ नहीं चलाते । यहाँ पूरा ईशावास्योपनिपद वोलते है । उनवी सुबह को प्रायना में कई इलोक आते थे। उसमें एक इलोक था-- स्वस्ति प्रजाभ्य. पररपालयन्ता न्याय्येन मागेंग सही सहीशा 7 गो-ब्रह्मणभ्य. शुभ अस्तु नित्य लोक. समस्ता सुखिनो भवतु। सभी लोग सुदी हो जायें 'राज्यवर्ता उत्तम रीति से रोज्य- पालन बरें और गयें और ब्राह्मण--दीनों या दुभ हो। वात ऐसी है कि आज गा्ये भी सवट में पड़ी हूं और ब्राह्मण भी सबर में पडा हूँ । इसनिये खादी को गाय वो साथ जोइना ही पड़ेगा। खादी आपको बपडा दगो, ओर खाने व लिय गाय था दूध मिलगा । आप लोग जो काम यर्‌ रह है यादी वा, उसमें व्यापार वो वात भी सा गई है । तो उगस अप मुक्त हो जयें एसी वात वाया आापयों वहेगा नहीं । चपोंति यह प्रंबिदकन (स्यावहारिग) नहीं हैे। इसलिये आपक थार्य चाप छुस्द पद चेत्यिद पि लितने गौव आपने स्वावलम्बी बनाये 7 श्ब्] [षियी तालीम




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