भारत का नया शासन - विधान | Bharat Ka Naya Shasan Vidhan
श्रेणी : इतिहास / History

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लेखक :
Book Language
हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज :
8 MB
कुल पष्ठ :
240
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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश
(Click to expand)विषय-प्रवेदय 9
लेकिन आजकल संयुक्तप्रान्त के नास से जाना जाता है । बंगाल प्रेसिडेंसी
के शेष भाग के लिए सनू १८५४ सें एक अलग लेफ़्टिनेण्ट-गवर्नर नियुक्त
किया गया । तब कही शारत-सरकार को प्रान्तीय शासन के कास से
छुटकारा सिला ।*
लेजिस्लेटिव संस्था का जन्म
पालंमेण्ट के सन् १८५३ के कानून से भारत सें कानून बनाने के
लिए एक पृथक लेजिस्लेटिव संस्था का जन्म हुआ । इसके अनुसार
कानून बनाने के निमित्त गवर्नर-जनरल की एग्कीक्यूटिव कौसिल में
६ सदस्यों की और नियुक्ति की गई, और उसके अधिवेशन भी खुलेआस
होने लगे । लेकिन कानून की निगाह में लेजिस्लेटिव कौसिल का कोई पृथक
अस्तित्व नहीं स्वीकार किया गया । कानून में तो इस कौसिल को कानून
बनाने के निमित्त गद्नर-जनरल की एग्जीक्यूटिव कौसिल के विस्तार के
रूप में ही साना गया । इसीलिए, इन नये शासिल किये गये सदस्यों को
कौसिल का पुरा सदस्य न कहकर “अतिरिक्त सदस्य' के सास से पुकारा
जाता था ।
इस प्रकार गवर्नेर-जनरल की एग्जीदयूटिव कौसिल से जो “अतिरिक्त
सदस्य' कानून-निर्साण के निसित्त नियुदत किये गये उनमें भी भारतीय कोई
१ सयुक््तप्रा्त और बयाल के बाद सन् १८५९ से पजाब के लिए,
सन् १९०५ में पूर्वी बगाल और आसास के लिए और सन् १९१२ से
विहार व उडीसा के छिए पृथक् लेफ्टिनेण्ट-गवर्नर नियुक्त किये यये ।
लेफ्टिनेण्ट-गवर्नरो की नियुक्ति आमतौर पर गवर्नेर-जनरल द्वारा
इण्डियन सिविल सर्विस के उच्च अफसरों मे से की जाती थी, जब कि
गवर्नरो की नियुक्ति सीधी विलायत से होती थी । मॉण्ट-फोड सुधारों के
वाद लेफ्टिनेण्ट-गव्नरो की नियुक्ति सर्वेथा बन्द होगई है और अब
उनकी जगह गवनेर ही नियुक्त किये जाते हैं ।
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