भारत का नया शासन - विधान | Bharat Ka Naya Shasan Vidhan

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पुस्तक का मशीन अनुवादित एक अंश

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विषय-प्रवेदय 9 लेकिन आजकल संयुक्तप्रान्त के नास से जाना जाता है । बंगाल प्रेसिडेंसी के शेष भाग के लिए सनू १८५४ सें एक अलग लेफ़्टिनेण्ट-गवर्नर नियुक्त किया गया । तब कही शारत-सरकार को प्रान्तीय शासन के कास से छुटकारा सिला ।* लेजिस्लेटिव संस्था का जन्म पालंमेण्ट के सन्‌ १८५३ के कानून से भारत सें कानून बनाने के लिए एक पृथक लेजिस्लेटिव संस्था का जन्म हुआ । इसके अनुसार कानून बनाने के निमित्त गवर्नर-जनरल की एग्कीक्यूटिव कौसिल में ६ सदस्यों की और नियुक्ति की गई, और उसके अधिवेशन भी खुलेआस होने लगे । लेकिन कानून की निगाह में लेजिस्लेटिव कौसिल का कोई पृथक अस्तित्व नहीं स्वीकार किया गया । कानून में तो इस कौसिल को कानून बनाने के निमित्त गद्नर-जनरल की एग्जीक्यूटिव कौसिल के विस्तार के रूप में ही साना गया । इसीलिए, इन नये शासिल किये गये सदस्यों को कौसिल का पुरा सदस्य न कहकर “अतिरिक्त सदस्य' के सास से पुकारा जाता था । इस प्रकार गवर्नेर-जनरल की एग्जीदयूटिव कौसिल से जो “अतिरिक्त सदस्य' कानून-निर्साण के निसित्त नियुदत किये गये उनमें भी भारतीय कोई १ सयुक्‍्तप्रा्त और बयाल के बाद सन्‌ १८५९ से पजाब के लिए, सन्‌ १९०५ में पूर्वी बगाल और आसास के लिए और सन्‌ १९१२ से विहार व उडीसा के छिए पृथक्‌ लेफ्टिनेण्ट-गवर्नर नियुक्त किये यये । लेफ्टिनेण्ट-गवर्नरो की नियुक्ति आमतौर पर गवर्नेर-जनरल द्वारा इण्डियन सिविल सर्विस के उच्च अफसरों मे से की जाती थी, जब कि गवर्नरो की नियुक्ति सीधी विलायत से होती थी । मॉण्ट-फोड सुधारों के वाद लेफ्टिनेण्ट-गव्नरो की नियुक्ति सर्वेथा बन्द होगई है और अब उनकी जगह गवनेर ही नियुक्त किये जाते हैं ।




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